मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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अक्सर मनुष्य अपने जीवन में किसी चमत्कार या किसी ऐसे अलौकिक मोड़ का इंतज़ार करता रहता है, जो उसकी दिशा बदल दे और रातों-रात उसकी सभी समस्याओं को हल कर दे, परंतु व्यावहारिक सत्य यह है कि चमत्कार मुफ़्त में या घर बैठे नहीं मिलते। “अगर आपकी जिंदगी में कोई चमत्कार नहीं हो रहा, तो कड़ी मेहनत और संघर्ष करके खुद चमत्कार बन जाओ”—यह विचार हमें आलस्य और भाग्य के भाव से बाहर निकालकर अपनी नियति का निर्माण खुद करने के लिए प्रेरित करता है। इतिहास इस बात का साक्षी है कि जिन लोगों ने दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई, वे किसी बड़े चमत्कार का इंतज़ार नहीं कर रहे थे। उन्होंने हर स्थिति में दृढ़ संकल्प और अटूट मेहनत का रास्ता चुना।
जब कोई व्यक्ति किसी असाधारण लक्ष्य को पाने के लिए दिन-रात एक कर देता है, अनुशासन का पालन करता है और असफलताओं के बाद भी हार नहीं मानता तो उसका परिणाम ही दुनिया के लिए एक चमत्कार बन जाता है।भाग्य के भरोसे बैठे रहना केवल उम्मीद जगाता है, लेकिन कर्म वह शक्ति है जो उम्मीदों को वास्तविकता में बदलती है। जब आप अपनी सीमाओं से आगे बढ़कर प्रयास करते हैं, अपने कौशल को तराशते हैं और निरंतर प्रगति करते हैं तो आपकी सफलता ही लोगों के लिए प्रेरणा की एक जीती-जागती मिसाल बन जाती है।अंततः, चमत्कार बाहर की दुनिया में खोजने की चीज़ नहीं है, यह आपके भीतर की इच्छाशक्ति और कड़ी मेहनत का ही दूसरा रूप है। इसलिए किसी अनहोनी का इंतज़ार करने के बजाय, अपने कर्म पर विश्वास रखें और अपनी मेहनत से ऐसा मुकाम हासिल करें कि आपका जीवन ही एक चमत्कार बन जाए।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

