Tuesday, September 29, 2026
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अक्सर बचपन में एक थाली में खाना खाने वाले सगे भाई बड़े होकर जर (दौलत), जोरू (पत्नी) और जमीन (सम्पत्ति) के विवाद में एक-दूसरे के बन जाते हैं जानी दुश्मन

मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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​बचपन के प्यार भरे लम्हों का वह दौर भी कितना खूबसूरत होता है, जब सगे भाइयों के बीच ना कोई दूरी होती है और ना कोई भेद। एक ही खिलौने से खेलना, एक ही थाली में खाना और एक-दूसरे के लिए पूरी दुनिया से लड़ जाना—यह मासूमियत और अटूट प्रेम की मिसाल होती है, लेकिन वही भाई जब बड़े होते हैं, शादी हो जाती है तो स्वार्थ के वशीभूत अक्सर समय का चक्र उनके इस पावन रिश्ते पर ग्रहण लगा देता है।​कहावत है कि दुनिया में अधिकांश विवादों की जड़ तीन चीजें जर (दौलत), जोरू (पत्नी) और जमीन (सम्पत्ति) होती हैं ।
​जर (दौलत) में पैसों की लालसा इंसानी विवेक को सुला देती है। धन के बंटवारे और हिस्सेदारी के चक्कर में भाई-भाई के बीच हिसाब किताब का ऐसा गणित शुरू होता है, जहाँ भावनाएँ शून्य हो जाती हैं। ​जोरू (पत्नी) में दो अलग-अलग परिवारों और विचारधाराओं से आई पत्नियों के आने के बाद प्राथमिकताएँ बदलने लगती हैं। व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएँ और घर की तुलनात्मक बातें धीरे-धीरे भाइयों के बीच दूरियाँ बढ़ाने लगती हैं। वहीं ​जमीन (सम्पत्ति) में पैतृक संपत्ति या जमीन का एक टुकड़ा अक्सर खून के रिश्ते से भी बड़ा लगने लगता है। ईंट-पत्थर और सीमाओं की लड़ाई में इंसान यह भूल जाता है कि वही जमीन का टुकड़ा कल किसी और का था और कल किसी और का होगा।
​ ​बचपन में जो हाथ एक-दूसरे को थामे रखते थे, बड़े होकर वही हाथ अदालतों के चक्कर काटने और एक-दूसरे का खून बहाने तक पर आमादा हो जाते हैं। धन और अहंकार की अंधी दौड़ में सगे भाई ‘जानी दुश्मन’ बन बैठते हैं । यहां यह भी सत्य है कि दौलत, जमीन या झूठी आन-बान सब यहीं छूट जानी है। कोई भी भौतिक वस्तु उस खून के रिश्ते से बड़ी नहीं हो सकती, जो बचपन से हमारी पहचान रहा है। इंसान को सोचना चाहिए कि कागज़ के टुकड़ों और जमीन के हिस्सों के लिए बचपन का वह पवित्र प्रेम खो देना मानवता की सबसे बड़ी हार है।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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