
पीएम श्री शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जराहमोहगांव में सम्मान समारोह, विद्यार्थियों और ग्रामीणों की आंखें हुईं नम
मूकनायक समाचार
सत्यशील गोंडाने
जराहमोहगांव (कटंगी), बालाघाट।गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर पीएम श्री शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जराहमोहगांव में स्थानांतरित हुए पांच शिक्षकों के सम्मान में भव्य एवं भावभीना विदाई समारोह आयोजित किया गया। शाला परिवार, जनप्रतिनिधियों, पालक-अभिभावकों, विद्यार्थियों तथा ग्रामीणों ने पांचों शिक्षकों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उन्हें आत्मीय विदाई दी। पूरे समारोह के दौरान कई अवसर ऐसे आए जब शिक्षक, छात्र-छात्राएं एवं उपस्थित अतिथि भावुक हो उठे।

कार्यक्रम का शुभारंभ महापुरुषों एवं मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण, पूजन-अर्चन तथा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर शिक्षक विनोद साकरे ने गुरु महिमा पर आधारित प्रेरणादायी कविता प्रस्तुत कर गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व को रेखांकित किया। इसके पश्चात छात्र-छात्राओं ने गीत, कविता, भाषण एवं रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपने गुरुजनों के प्रति श्रद्धा और सम्मान प्रकट किया। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन शिक्षक एस.सी. चौधरी ने किया।
विद्यालय के प्राचार्य यू.एस. परते ने कहा कि शिक्षक समाज की सबसे बड़ी पूंजी होते हैं। स्थानांतरण एक प्रशासनिक प्रक्रिया है, लेकिन शिक्षक अपने कार्य, अनुशासन और संस्कारों के माध्यम से सदैव लोगों के दिलों में जीवित रहते हैं। उन्होंने स्थानांतरित सभी शिक्षकों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
समारोह में एसएमसी अध्यक्ष छबि कुमार मरठे, सरपंच योगेश डोंगरे, पूर्व सरपंच नोकेंद्र सिंगनदुपे, प्रधान पाठक जे.एन. मंडावी सहित जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों एवं प्रबुद्ध नागरिकों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए स्थानांतरित शिक्षकों की सेवाओं की सराहना की।
विदाई समारोह का सबसे भावुक क्षण तब आया जब एक-एक कर पांचों शिक्षकों के सेवाकाल और योगदान का उल्लेख किया गया। शिक्षक आर.के. गोडाने ने विद्यालय में लगातार 28 वर्षों तक सेवाएं देते हुए शिक्षण के साथ-साथ बीएलओ के रूप में भी उल्लेखनीय कार्य किया। उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें जिला कलेक्टर द्वारा प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया जा चुका है। प्रधान पाठक जे.एन. मंडावी ने लगभग 17 वर्षों तक विद्यालय में शैक्षणिक गुणवत्ता एवं अनुशासन को नई पहचान दिलाई। वहीं भूषण लिल्लारे, आर. कारमेघे और अरुणा शेख ने भी अपने कार्यकाल के दौरान विद्यार्थियों के बीच अपनी विशिष्ट पहचान बनाई।
स्थानांतरित शिक्षकों ने अपने उद्बोधन में विद्यालय परिवार, विद्यार्थियों, पालकों और ग्रामीणों के स्नेह एवं सहयोग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जराहमोहगांव में बिताया गया समय उनके जीवन की सबसे अमूल्य स्मृतियों में हमेशा शामिल रहेगा। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान अनजाने में हुई किसी भी त्रुटि के लिए सभी से क्षमा भी मांगी।
विद्यार्थियों ने अपने प्रिय शिक्षकों को स्मृति-चिन्ह एवं शुभकामना संदेश भेंट किए। शाला परिवार की ओर से पांचों शिक्षकों को शाल, श्रीफल, सूटकेस, स्मृति-चिन्ह एवं अन्य उपहार देकर सम्मानित किया गया। समारोह के उपरांत बाजे-गाजे के साथ शिक्षकों को सम्मानपूर्वक विदाई दी गई। ग्रामीणों एवं विद्यार्थियों ने पुष्पवर्षा कर अपने प्रिय गुरुजनों के प्रति सम्मान और स्नेह व्यक्त किया।
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित यह सम्मान एवं विदाई समारोह शिक्षा, संस्कार, गुरु-शिष्य परंपरा और आत्मीयता का ऐसा प्रेरणादायी उदाहरण बन गया, जिसे क्षेत्र लंबे समय तक याद रखेगा।

