मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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इंसान का जीवन प्रेम, सहानुभूति और आपसी संबंधों की नींव पर टिका होता है, लेकिन अक्सर इंसान की अपनी ही कुछ आदतें और व्यवहार उसके और दूसरों के बीच ऐसी दूरियां पैदा कर देते हैं, जिन्हें मिटाना लगभग असंभव हो जाता है। इंसान को इंसान से दूर करने में जिन तीन चीज़ों की सबसे मुख्य भूमिका होती है, वे हैं— कड़वी जुबान, पैसों का अहंकार और दूसरों के प्रति उसका ख़राब व्यवहार। वाणी मनुष्य को मिला एक ऐसा वरदान है, जो किसी भी घाव को भर सकती है और यदि गलत तरीके से प्रयोग की जाए, तो गहरे से गहरा घाव भी दे सकती है। इंसान की कड़वी जुबान सीधे दूसरों के दिल पर चोट करती है। शारीरिक चोट का घाव समय के साथ भर जाता है, लेकिन जुबान से निकले कड़वे शब्द ताउम्र इंसान के दिमाग में चुभते रहते हैं। जब बातचीत से मिठास और सम्मान गायब हो जाता है, तो रिश्तों का टूटना तय होता है।
पैसा जीवन चलाने का केवल साधन है, लेकिन जब यह इंसान के दिमाग पर हावी हो जाता है, तो अहंकार बन जाता है। पैसों का घमंड व्यक्ति को अंधा बना देता है, जिससे वह दूसरों को अपने से छोटा और कमतर समझने लगता है। वह भूल जाता है कि समय कभी एक जैसा नहीं रहता। पैसों के अहंकार से ग्रस्त व्यक्ति अक्सर अपनों से कट जाता है क्योंकि इंसान का व्यवहार ही उसकी असली पहचान होता है। दूसरों को नीचा दिखाना, उनके प्रति रूखापन रखना, संवेदनहीनता दिखाना या स्वार्थी होना—ये सब ऐसे लक्षण हैं, जो लोगों को धीरे-धीरे एक दूसरे से दूर कर देते हैं। कोई भी व्यक्ति ऐसे इंसान के साथ रहना पसंद नहीं करता जो दूसरों की इज़्ज़त करना नहीं जानता। यदि इंसान को दुनिया में सच्चा सम्मान और अपनों का साथ पाना है तो उसे अपनी वाणी में मिठास, अपने स्वभाव में विनम्रता और व्यवहार में इंसानियत को शामिल करना ही होगा।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

