मूकनायक/रिपोर्टर, राजेश कुमार/बस्ती/उत्तर प्रदेश
सील परिसर में मेडिकल एजेंसी संचालन को लेकर उठे गंभीर सवाल, सीएमओ की कार्यप्रणाली पर मुख्यमंत्री से शिकायत; व अपर आयुक्त ने भी शिकायत पत्र दिए डीएम एवं हेल्थ एडी से जांच के निर्देश
सिद्धार्थनगर। इटवा–डुमरियागंज–बढ़नी मार्ग स्थित जनता सेवा हॉस्पिटल परिसर में पूर्व में सील किए गए भवन में संचालित “एम.ए. फार्मा एवं मेडिकल एजेंसी” को खोले जाने और संचालन की अनुमति से संबंधित प्रक्रिया को लेकर अब स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। मामले में मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश और मंडलायुक्त बस्ती मंडल सहित संबंधित अधिकारियों को शिकायत भेजकर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जनता सेवा हॉस्पिटल परिसर को पूर्व में सक्षम प्राधिकारी के आदेश पर सील किया गया था। इसके बाद उसी परिसर में संचालित मेडिकल एजेंसी को खोले जाने की प्रक्रिया में किन नियमों और आदेशों का पालन किया गया, यह स्पष्ट किया जाना आवश्यक है मामले की जानकारी लेने पर ड्रग इंस्पेक्टर मनोज कुमार सिंह की ओर से बताया गया कि भवन सील किए जाने के बाद इस संबंध में उनसे कोई आधिकारिक पत्राचार नहीं किया गया था। यह भी सवाल उठाया गया है कि मेडिकल एजेंसी के ड्रग लाइसेंस, पंजीकरण, स्वीकृत परिसर, प्रिमाइसेस प्लान, भंडारण व्यवस्था और अन्य निर्धारित मानकों का संबंधित औषधि विभाग से नियमानुसार सत्यापन कराया गया था या नहीं।
बताया गया कि संबंधित मेडिकल एजेंसी संचालक की ओर से एक पत्र लेकर ड्रग इंस्पेक्टर से संपर्क किया गया था। इस दौरान कथित तौर पर यह स्पष्ट किया गया कि किसी सील भवन को खोलने का अधिकार उसी सक्षम अधिकारी के पास होता है, जिसके आदेश से भवन सील किया गया हो। ऐसे में सवाल उठाया गया है कि यदि मेडिकल एजेंसी के संबंध में औषधि विभाग से कोई आधिकारिक पत्राचार नहीं हुआ था, तो सील परिसर में मेडिकल एजेंसी के संचालन की प्रक्रिया किस आधार पर आगे बढ़ाई गई शिकायतकर्ता की ओर से दावा किया गया है कि ड्रग इंस्पेक्टर मनोज कुमार सिंह एवं सीएमओ सिद्धार्थनगर डॉ. प्रमोद कुमार से हुई बातचीत से संबंधित रिकॉर्डिंग सुरक्षित है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर सक्षम जांच अधिकारी के समक्ष साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। हालांकि, इन दावों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि जनता सेवा हॉस्पिटल से संबंधित पूर्व शिकायतें मंडलायुक्त बस्ती, अपर निदेशक स्वास्थ्य बस्ती मंडल और मुख्यमंत्री सहित अन्य अधिकारियों के समक्ष की जा चुकी हैं, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई और जांच की स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में सवाल उठाया गया है कि पूर्व शिकायतों की जांच लंबित रहने के दौरान सील परिसर को खोलने की प्रक्रिया में इतनी जल्दबाजी क्यों की गई।
इसी क्रम में मंडलायुक्त बस्ती मंडल को दिए गए प्रार्थना पत्र में मेडिकल एजेंसी के ड्रग लाइसेंस, पंजीकरण, स्वीकृत परिसर और सील किए गए भवन में संचालन की उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है। साथ ही जांच पूरी होने तक मेडिकल एजेंसी को खोलने अथवा संचालन की अनुमति पर रोक लगाने की मांग भी की गई है। शिकायत पर अपर आयुक्त की ओर से जांच कराए जाने के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई है अब पूरे मामले में यह जांच का विषय है कि सील भवन को खोलने और मेडिकल एजेंसी के संचालन की अनुमति देने की प्रक्रिया नियमानुसार थी या नहीं। यदि जांच में किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी या प्रक्रिया में अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों एवं जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका निर्धारित कर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, यदि प्रक्रिया नियमों के अनुरूप पाई जाती है तो संबंधित विभाग द्वारा अभिलेखों के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जा सकेगी शिकायतकर्ता ने कहा कि पूरे प्रकरण में जल्द निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराकर यदि नियमानुसार कार्रवाई नहीं की गई तो मामले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी की जाएगी। शिकायतकर्ता का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी अधिकारी या व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाना नहीं, बल्कि सील भवन को खोले जाने और मेडिकल एजेंसी के संचालन से संबंधित पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक स्थिति सामने लाना है। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएं, उनके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

