मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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भारतीय संस्कृति और जीवन शैली में सावन (श्रावण) मास का विशेष महत्व है। यह हमारे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, आत्म-शुद्धि और प्रकृति के साथ तादात्म्य स्थापित करने का एक पावन संदेश लेकर आता है । भीषण गर्मी और तपन के बाद जब सावन की पहली फुहारें धरती पर गिरती हैं, तो यह मन और मस्तिष्क को नवजीवन देती हैं। सावन का महीना हमें सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों (गर्मी) के बाद शीतलता और सुख (बारिश) का आना निश्चित है। यह समय संयम, ध्यान और अपने विचारों को शुद्ध कर जीवन में सकारात्मकता अपनाने का अवसर देता है। सावन आते ही चारों ओर हरियाली छा जाती है, जिससे ना केवल दृश्य सुंदर बनता है बल्कि हवा भी शुद्ध और ताजी हो जाती है। यह मास प्रकृति के पुनर्जीवन का समय है। नदियाँ, तालाब और भूमि जल से परिपूर्ण हो जाते हैं ।
सावन हमें यह भी याद दिलाता है कि मानव जीवन पूरी तरह से प्रकृति पर निर्भर है, इसलिए पर्यावरण की रक्षा और संवर्धन हमारा प्राथमिक कर्तव्य है । भारतीय परंपरा में सावन के महीने में वृक्षारोपण करने की परंपरा रही है। नीम, पीपल, बरगद और बेलपत्र जैसे अनेक पौधों का रोपण इस समय सर्वोपरि माना जाता है। सावन का यह रूप हमें संदेश देता है कि यदि हम प्रकृति का सम्मान करेंगे और उसका संतुलन बनाए रखेंगे, तो प्रकृति भी हमें आरोग्य, समृद्धि और जीवन दायिनी वायु प्रदान करेगी। सावन मास हमें बाहरी वातावरण के साथ-साथ अपने भीतर की स्वच्छता का भी पाठ पढ़ाता है। यह महीना हमें प्रकृति से जुड़ने, पर्यावरण को स्वच्छ व हरा-भरा रखने और संयमित जीवन शैली अपनाकर एक सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

