
पंचकर्म और शिरोधारा जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों से कई गंभीर मरीजों को मिली राहत, बिना सर्जरी बेहतर हुआ स्वास्थ्य
रायपुर, 30 जुलाई 2026। नारायणपुर जिले में आयुष विभाग की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियाँ गंभीर और जटिल बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए नई उम्मीद बनकर उभर रही हैं। यूनानी और आयुर्वेदिक औषधियों के साथ पंचकर्म एवं शिरोधारा जैसी पारंपरिक चिकित्सा तकनीकों के समन्वित उपयोग से कई मरीजों को राहत मिली है। आयुष विभाग के चिकित्सकों के प्रयासों से ऐसे मरीज, जो लंबे समय से दर्द, कमजोरी और शारीरिक असुविधाओं से परेशान थे, अब सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं।
नारायणपुर निवासी 45 वर्षीय इश्वरी यादव लंबे समय से दोनों घुटनों के असहनीय दर्द, सूजन और चलने-फिरने में कठिनाई से परेशान थीं। चिकित्सकीय सलाह में उन्हें घुटना प्रत्यारोपण कराने की बात कही गई थी, लेकिन आयुष विभाग में यूनानी एवं आयुर्वेदिक औषधियों के साथ नियमित शिरोधारा उपचार लेने के बाद उनकी स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ। बिना सर्जरी के दर्द और सूजन में राहत मिलने के बाद वे अब सामान्य दिनचर्या के साथ अपना होटल भी संचालित कर रही हैं।
इसी प्रकार 55 वर्षीय प्रमोद पाण्डेय मधुमेह के कारण अत्यधिक कमजोरी, पैरों में भारीपन, नसों में झुनझुनी और मानसिक तनाव से ग्रस्त थे। वे लगभग 100 मीटर तक भी पैदल चलने में असमर्थ हो गए थे। आयुष विभाग में यूनानी और आयुर्वेदिक औषधियों के साथ शिरोधारा चिकित्सा दिए जाने के बाद उनके तनाव में कमी आई तथा चलने-फिरने की क्षमता और नर्वस सिस्टम में सुधार दर्ज किया गया।
35 वर्षीय अर्पना नाग को गर्भावस्था के दौरान शुरू हुआ दाहिने पैर का दर्द और झुनझुनी प्रसव के बाद भी कई महीनों तक बनी रही। आयुष केंद्र में यूनानी-आयुर्वेदिक उपचार के साथ पंचकर्म चिकित्सा प्रारंभ की गई। उपचार के एक सप्ताह के भीतर उन्हें 50 प्रतिशत से अधिक राहत मिली और लगभग दो माह के उपचार के बाद वे पूरी तरह स्वस्थ हो गईं।
महिलाओं में होने वाली जटिल स्वास्थ्य समस्याओं के उपचार में भी आयुष चिकित्सा प्रभावी साबित हो रही है। 50 वर्षीय कल्पना शर्मा पिछले एक वर्ष से मेनोरेजिया (अत्यधिक एवं अनियमित मासिक रक्तस्राव) की समस्या से पीड़ित थीं। आयुष विभाग द्वारा दिए गए विशेष यूनानी और आयुर्वेदिक उपचार से मात्र 10 दिनों में उनका रक्तस्राव नियंत्रित हो गया तथा पेट दर्द और कमजोरी से भी राहत मिली।
आयुष विभाग के अनुसार नारायणपुर में यूनानी और आयुर्वेद के समन्वित उपचार से प्राप्त परिणाम यह दर्शाते हैं कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का वैज्ञानिक और समन्वित उपयोग कई रोगों के उपचार में प्रभावी भूमिका निभा सकता है। सुरक्षित, सुलभ और कम खर्चीले उपचार के माध्यम से जिले में जनस्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने का प्रयास किया जा रहा है।

