Tuesday, September 29, 2026
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लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 का मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया स्वागत

कहा— युवाओं के सुरक्षित भविष्य, पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था और परीक्षा माफिया पर कार्रवाई की दिशा में ऐतिहासिक कदम

रायपुर, 29 जुलाई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने लोकसभा में पारित लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 का स्वागत करते हुए इसे देश के करोड़ों युवाओं के सुरक्षित भविष्य, ईमानदार प्रतिभा और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी कदम बताया है। उन्होंने कहा कि यह संशोधन परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने और संगठित परीक्षा अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाएं लाखों-करोड़ों युवाओं के परिश्रम, सपनों और भविष्य से जुड़ी होती हैं। ऐसे में प्रश्नपत्र लीक, नकल माफिया और संगठित परीक्षा अपराध जैसी गतिविधियां योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय करने के साथ-साथ पूरी परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को भी प्रभावित करती हैं। नए संशोधन से ऐसे अपराधों पर कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित होगी और परीक्षा प्रणाली अधिक मजबूत बनेगी।

उन्होंने बताया कि संशोधन विधेयक के तहत परीक्षा संबंधी अपराधों के विरुद्ध दंडात्मक प्रावधानों को और अधिक सख्त बनाया गया है। इससे परीक्षा माफिया, संगठित आपराधिक गिरोहों तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता में शामिल तत्वों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई का मार्ग प्रशस्त होगा। साथ ही परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों और सेवा प्रदाताओं की जवाबदेही भी बढ़ेगी, जिससे पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और विश्वसनीय बन सकेगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार युवाओं के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए नई शिक्षा नीति, कौशल विकास, रोजगार सृजन और डिजिटल पारदर्शिता जैसे क्षेत्रों में लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित और निष्पक्ष बनाने की दिशा में यह संशोधन भी उसी श्रृंखला की महत्वपूर्ण कड़ी है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह संशोधन मेहनती एवं प्रतिभाशाली युवाओं का परीक्षा प्रणाली पर विश्वास और मजबूत करेगा तथा योग्यता आधारित, निष्पक्ष एवं पारदर्शी चयन प्रक्रिया को नई मजबूती प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का निर्माण तभी संभव है, जब प्रत्येक युवा को उसकी योग्यता और परिश्रम के अनुरूप निष्पक्ष अवसर प्राप्त हों।

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