Friday, July 17, 2026
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भावनाओं को समझने वाला अनपढ़ आदमी भी होता है दुनिया का सबसे ज्ञानी व्यक्ति

मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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अक्सर हम ‘ज्ञान’ का अर्थ किताबी पढ़ाई, डिग्रियों और बड़ी-बड़ी यूनिवर्सिटी के सर्टिफिकेट से लगाते हैं, लेकिन जीवन का वास्तविक ज्ञान केवल पन्नों में सिमटा नहीं होता, बल्कि सच्चा ज्ञान वह है, जो मनुष्य को संवेदनशील, धैर्यवान और दूसरों के प्रति सहानुभूति रखने वाला बनाए। इसलिए, यदि कोई व्यक्ति पूरी तरह अनपढ़ है, लेकिन वह दूसरों की भावनाओं, सुख-दुख और मौन को समझने की क्षमता रखता है, तो वह दुनिया के किसी भी तथाकथित विद्वान से अधिक ज्ञानी है । एक पढ़ा-लिखा व्यक्ति इतिहास और भूगोल का ज्ञाता हो सकता है, लेकिन यदि वह किसी के बहते हुए आंसुओं के पीछे का दर्द नहीं पढ़ सकता, तो उसका ज्ञान अधूरा है। इसके विपरीत, एक अनपढ़ व्यक्ति जो दूसरों के दर्द को देखकर खुद द्रवित हो जाता है, वह मानवता के सबसे बड़े नियम को जानता है।
हमारे समाज में ऐसे कई उदाहरण हैं, जहाँ बिना पढ़े-लिखे लोगों ने अपने व्यावहारिक ज्ञान से समाज को सही दिशा दिखाई है। “पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोई । ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होइ।” कबीरदास जी का यह दोहा इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है। अक्षर ज्ञान अहंकार दे सकता है, लेकिन भावनाओं की समझ करुणा और विनम्रता लाती है। एक पढ़ा-लिखा व्यक्ति अपनी बुद्धि के अहंकार में रिश्तों को तोड़ सकता है, जबकि भावनाओं को समझने वाला एक साधारण इंसान अपनी समझदारी से बिखरे हुए परिवारों और समाज को जोड़ कर रखता है। ज्ञान का अंतिम उद्देश्य मनुष्य को ‘इंसान’ बनाना है। डिग्रियां केवल एक कागज का टुकड़ा हैं यदि वे व्यक्ति को संवेदनशील न बना सकें। जो व्यक्ति दूसरों के सुख में सुखी और दुख में दुखी होना जानता है, जिसके पास रिश्तों को निभाने की समझ है, वही वास्तव में सबसे बड़ा ज्ञानी है। इसलिए, भावनाओं को समझने वाला अनपढ़ व्यक्ति भले ही अपना नाम लिखना ना जानता हो, लेकिन वह जीवन की सबसे बड़ी किताब—’मानवता’—को पूरी तरह समझ चुका होता है।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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