
जांजगीर-चांपा के विद्यालयों में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में आत्मरक्षा तकनीकों, गुड टच-बैड टच, हेल्पलाइन सेवाओं और एचपीवी टीकाकरण की दी गई जानकारी
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना के अंतर्गत जांजगीर-चांपा जिले के शासकीय नवीन पूर्व माध्यमिक शाला, पोड़ी (राछा) तथा शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कुरियारी में बालिकाओं के लिए आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बालिकाओं में आत्मविश्वास विकसित करना, उन्हें आत्मरक्षा के व्यावहारिक कौशल से दक्ष बनाना तथा आपातकालीन परिस्थितियों में स्वयं की सुरक्षा के लिए सक्षम बनाना था।
जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान सेल्फ डिफेंस ऑर्गेनाइजेशन ऑफ छत्तीसगढ़ की प्रशिक्षक ने बालिकाओं को विभिन्न आत्मरक्षा तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। उन्होंने अचानक हमले, गला दबाने या किसी के द्वारा पकड़ लिए जाने जैसी परिस्थितियों से सुरक्षित बाहर निकलने के प्रभावी उपाय बताए। साथ ही दैनिक उपयोग की वस्तुओं का आवश्यकता पड़ने पर आत्मरक्षा में किस प्रकार उपयोग किया जा सकता है, इसका भी प्रदर्शन किया गया।
कार्यक्रम में बालिकाओं के साथ-साथ बालकों को भी ‘गुड टच’ और ‘बैड टच’ की जानकारी दी गई। सुरक्षित एवं असुरक्षित स्पर्श की पहचान, किसी भी अनुचित व्यवहार का साहसपूर्वक विरोध करने तथा ऐसी स्थिति में बिना संकोच अपने माता-पिता, शिक्षक या किसी विश्वसनीय वयस्क को तत्काल जानकारी देने के लिए प्रेरित किया गया।
इस दौरान विद्यार्थियों को चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, आपातकालीन सेवा 112, महिला हेल्पलाइन 181, एम्बुलेंस सेवा 108, जननी एक्सप्रेस 102 तथा रेलवे हेल्पलाइन 139 जैसी महत्वपूर्ण सहायता सेवाओं की जानकारी भी दी गई, ताकि आवश्यकता पड़ने पर वे इन सेवाओं का प्रभावी उपयोग कर सकें।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में किशोरियों को मासिक धर्म स्वच्छता, संतुलित एवं पौष्टिक आहार तथा एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) वैक्सीन के महत्व के संबंध में भी विस्तार से जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि एचपीवी टीकाकरण भविष्य में सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाव का प्रभावी माध्यम है। शिक्षकों से भी इस विषय पर छात्राओं के साथ नियमित संवाद बनाए रखने का आग्रह किया गया।
कार्यक्रम के समापन पर बालिकाओं को संदेश दिया गया कि वे किसी भी विषम परिस्थिति में घबराने के बजाय साहस, आत्मविश्वास और सूझबूझ के साथ उसका सामना करें तथा आवश्यकता पड़ने पर दूसरों की सहायता के लिए भी आगे आएं। महिला एवं बाल विकास विभाग ने इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बालिकाओं के सर्वांगीण सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

