

विशेषज्ञों ने युवाओं को नवाचार, स्वरोजगार और स्टार्टअप संस्कृति अपनाकर रोजगार सृजक बनने के लिए किया प्रेरित
वारासिवनी, 12 जुलाई। शासकीय शंकरसाव पटेल (एसएसपी) महाविद्यालय में स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ के तत्वावधान में “स्टार्टअप एवं उद्यमिता” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को स्वरोजगार, नवाचार एवं उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ हुआ। कार्यशाला में विद्यार्थियों को स्टार्टअप की अवधारणा, व्यवसाय प्रारंभ करने की प्रक्रिया, सरकारी योजनाओं, वित्तीय सहायता तथा उद्यमिता के व्यावहारिक पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी गई।
मुख्य अतिथि डॉ. गोरखनाथ भुरे ने कहा कि वर्तमान समय में युवा केवल नौकरी तलाशने तक सीमित न रहें, बल्कि अपने ज्ञान, कौशल और नवाचार के माध्यम से नए अवसरों का सृजन करें। उन्होंने बताया कि स्टार्टअप समाज की समस्याओं के समाधान का प्रभावी माध्यम बन सकता है तथा सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेकर युवा सफल उद्यमी बन सकते हैं।
विशिष्ट अतिथि डॉ. श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों से रोजगार लेने के बजाय रोजगार देने की सोच विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप संस्कृति देश की आर्थिक प्रगति का महत्वपूर्ण आधार बन रही है और ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं के लिए भी इसमें व्यापक संभावनाएं हैं।
महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ. एस.एस. गेडाम ने विद्यार्थियों से शिक्षा को व्यवहारिक जीवन से जोड़ने तथा स्वरोजगार को करियर का मजबूत विकल्प बनाने का आग्रह किया। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने व्यवसाय योजना, वित्तीय संसाधन, सरकारी अनुदान, डिजिटल माध्यमों के उपयोग तथा कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, ई-कॉमर्स, पर्यटन एवं स्थानीय उत्पादों से जुड़े स्टार्टअप अवसरों पर भी जानकारी दी।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उद्यमिता से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने व्यवहारिक उदाहरणों के माध्यम से समाधान किया। इस अवसर पर डॉ. रक्षा निकोसे, हेमंत कुमार गणवीर, कृष्णा पराते, डॉ. योगेश बिसेन, नेहा मर्सकोले, हिमांशु गुरदे सहित महाविद्यालय के शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रो. नरेन्द्र कुमार डोंगरे ने किया।

