

बुद्ध-अम्बेडकर मिशन के आयोजन में शांति, सौहार्द, संविधान और सामाजिक समरसता का दिया गया संदेश
संवाददाता : सत्यशील गोंडाने
बालाघाट/कटंगी। आषाढ़ी पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा) के पावन अवसर पर कटंगी तहसील के ग्राम खजरी स्थित बुद्ध-अम्बेडकर मिशन प्रचार-प्रसार संघ, मध्य भारत के धम्म प्रशिक्षण केंद्र में भगवान तथागत गौतम बुद्ध की नवीन प्रतिमा का विधिवत अनावरण एवं स्थापना समारोह श्रद्धा, आस्था और सामाजिक सौहार्द के वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम ने धार्मिक आस्था के साथ-साथ शांति, भाईचारे, सामाजिक समरसता और भारतीय संविधान के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रभावी संदेश दिया।

जानकारी के अनुसार धम्म प्रशिक्षण केंद्र में लगभग 25 वर्ष पूर्व स्थापित भगवान बुद्ध की प्रतिमा समय के साथ क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसकी जानकारी मिलते ही ग्राम खजरी के युवाओं एवं बुद्ध-अम्बेडकर मिशन के कार्यकर्ताओं ने गंभीरता और जिम्मेदारी का परिचय देते हुए शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में पहल की। किसी भी प्रकार की सामाजिक अथवा धार्मिक तनाव की स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए अधिवक्ता डॉ. संजय खोबरागड़े ने थाना प्रभारी कटंगी से मुलाकात कर पूरी स्थिति से अवगत कराया।

इसके पश्चात बुद्ध-अम्बेडकर मिशन के सहयोग से जबलपुर से भगवान तथागत सम्यक संबुद्ध की नवीन प्रतिमा मंगाई गई। 29 जुलाई 2026 को आषाढ़ी पूर्णिमा के शुभ अवसर पर धम्म प्रशिक्षण केंद्र में धार्मिक रीति-रिवाजों एवं श्रद्धा के साथ प्रतिमा का विधिवत अनावरण एवं स्थापना की गई। समारोह में थाना प्रभारी कटंगी की गरिमामयी उपस्थिति रही तथा अधिवक्ता डॉ. संजय खोबरागड़े के करकमलों से प्रतिमा का अनावरण संपन्न हुआ।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्राम खजरी के नागरिक, बुद्ध-अम्बेडकर मिशन के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, युवा एवं बुद्ध अनुयायी उपस्थित रहे। पूरे परिसर में “नमो बुद्धाय” और “जय भीम” के उद्घोष गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने भगवान बुद्ध की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर विश्व शांति, मानव कल्याण तथा सामाजिक सद्भाव की मंगलकामना की।
अपने प्रेरक उद्बोधन में अधिवक्ता डॉ. संजय खोबरागड़े ने कहा कि भगवान बुद्ध की करुणा, मैत्री और अहिंसा की शिक्षाएं आज भी संपूर्ण मानवता के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने कहा कि प्रेम, समानता और भाईचारे की स्थापना ही बुद्ध धम्म का मूल उद्देश्य है तथा यदि प्रत्येक व्यक्ति बुद्ध के बताए मार्ग पर चले तो समाज से हिंसा, द्वेष और भेदभाव स्वतः समाप्त हो सकते हैं।

उन्होंने भारत रत्न डॉ. भीमराव अम्बेडकर का स्मरण करते हुए कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को समानता, न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व का अधिकार प्रदान करता है। संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और लोकतांत्रिक मूल्यों का मार्गदर्शक ग्रंथ है। उन्होंने उपस्थित नागरिकों से संविधान की भावना के अनुरूप सामाजिक समरसता, आपसी सौहार्द और शांतिपूर्ण जीवन अपनाने का आह्वान किया।

डॉ. संजय खोबरागड़े ने कहा कि धार्मिक आस्था का वास्तविक उद्देश्य समाज में मानवता, सद्भाव और सकारात्मक सोच का विस्तार करना है। उन्होंने ग्राम खजरी के युवाओं की सराहना करते हुए कहा कि जिस परिपक्वता और जिम्मेदारी के साथ उन्होंने इस विषय का शांतिपूर्ण समाधान किया, वह पूरे समाज के लिए प्रेरणादायी एवं अनुकरणीय उदाहरण है।
कार्यक्रम के समापन पर सभी उपासकों एवं उनके परिवारों के सुख, शांति और समृद्धि की मंगलकामना की गई। साथ ही शिक्षा, संगठन और सामाजिक जागरूकता के माध्यम से समाज को आगे बढ़ाने तथा भगवान बुद्ध एवं डॉ. भीमराव अम्बेडकर के आदर्शों पर चलकर शांति, समानता और भाईचारे का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया गया।
आषाढ़ी पूर्णिमा पर आयोजित यह समारोह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि सामाजिक चेतना, संवैधानिक मूल्यों और मानवीय एकता का प्रेरक संदेश देने वाला महत्वपूर्ण आयोजन सिद्ध हुआ। बुद्ध-अम्बेडकर मिशन द्वारा किया गया यह प्रयास समाज में सौहार्द, सामाजिक समरसता और सकारात्मक संवाद को सुदृढ़ करने की दिशा में एक सराहनीय पहल माना जा रहा है।

