मूकनायक समाचार । सूरत
बारिश की मौसम में कइ जगहों पर पानी भर जाता है उस वक्त बच्चों को स्कूल में आने में काफी परेशानी होती है इतना ही नहीं जब स्कूल के आसपास पानी अधिक भर जाता है तब जाकर भी आचार्यों स्कूलों में बच्चों को छुट्टी देने में कलेक्टर या शिक्षाधिकारी के आदेश का इन्तजार करते थे। इस कारण कई बार पानी अधिक भर जाने से काफी मुश्किल का सामना करना पडता था। अब आचार्यों ही खुद निर्णय ले सकेंगे की स्कूल कब बंद करना है।
सूरत शहर में अब बारिश की मौसम शुरू होने जा रही है। ऐसे में छात्रों की सुरक्षा को लेकर मार्गदर्शिका घोषित की गई है। जिसमें जिला शिक्षाधिकारी भगीरथसिंह परमार ने आदेश दिया है कि बारिश की मौसम के दौरान वोटर टेन्क, सेप्टी टेन्क और खालकूवा के आसपास फेन्सिंग लगाई जाए और उन्हें लोक किया जाए। अगर मैदान में भी गड्ढे है तो वहां चेतावनी बोर्ड लगाया जाए। इमरजन्सी के तौर पर स्कूल में फर्स्ट एइड बोक्स तैयार रखे जाए और दमकल विभाग तथा स्थानिय अधिकारीयों के संपर्क नंबर नोटिस बोर्ड पर लगाए जाए। साथ ही स्कूल के जर्जरित कमरे जिसमें अधिक भयजनक हो ऐसे कमरे तत्काल तोड दिया जाए या वहां पर प्रवेशबंधी की जाए।
बिजली के जोखमी वायरों का समारकाम, अर्थिंग की जांच और स्कूल परिसर में रुकावट में आने वाले वृक्ष, शाखाएं दूर की जाए। सुरक्षा में लापरवाही दिखाई दी तो आचार्य या मैनेजमेन्ट के खिलाफ शिस्तभंग तक की कार्रवाई की जाएंगी। बारिश के मौसम के दौरान सबसे अधिक महत्व का प्रश्न बारिश जहां भारी हो उस समय स्कूल चालु रखनी या बंद रखनी इसके लिए आचार्यों हमेशा चिंता में रहते थे, और जिला शिक्षाधिकारी या कलेक्टर का आदेश का इन्तजार करते थे। ऐसे कई बार स्थिति गंभीर हो जाती थी उसे ध्यान में रखते हुए आचार्यों को अपनी विवेकबुद्धि से बच्चों को कब छुट्टी देनी है इसका निर्णय लेना होगा। स्कूल बंद रखनी या चालु रखनी इसकी सत्ता आचार्यों को दी गई है।

