मूकनायक/रिपोर्टर, राजेश कुमार/बस्ती/उत्तर प्रदेश
बस्ती जनपद के गौर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बभनगवां निवासी धीरेंद्र कुमार पुत्र बनारसी, जो कक्षा 10वीं का छात्र है, ने उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की अंकपत्र व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। परीक्षार्थी का अनुक्रमांक (Roll No.) 1262444612 है। छात्र ने वर्ष 2026 की हाईस्कूल (10वीं) परीक्षा दी थी। परिषद द्वारा परीक्षाफल घोषित किए जाने के उपरांत जब इंटरनेट के माध्यम से उसका परिणाम देखा गया तो उसमें परीक्षार्थी को उत्तीर्ण घोषित करते हुए उत्कृष्ट अंक प्राप्त हुए थे।
छात्र का आरोप है कि बोर्ड परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद जब उसने अपना अंकपत्र डाउनलोड किया तो उसमें उसे लगभग 91 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए थे। लेकिन बाद में दोबारा अंकपत्र डाउनलोड करने पर सभी विषयों के अंक पहले से कम दिखाई दिए, जिससे उसका कुल प्रतिशत घटकर 78.83 प्रतिशत रह गया।
छात्र और उसके परिजनों का कहना है कि यदि यह तकनीकी त्रुटि, डेटा अपडेट में लापरवाही अथवा किसी अधिकारी की गलती का परिणाम है तो यह अत्यंत गंभीर मामला है। एक छात्र की मेहनत और उसके भविष्य से जुड़ा ऐसा मामला न केवल शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाता है, बल्कि विद्यार्थियों और अभिभावकों के मन में भी असमंजस एवं अविश्वास पैदा करता है।
धीरेंद्र कुमार ने यूपी बोर्ड से मांग की है कि उसकी मार्कशीट की निष्पक्ष जांच कर सही अंकपत्र जारी किया जाए। साथ ही यदि जांच में किसी प्रशासनिक अधिकारी, कर्मचारी अथवा संबंधित व्यक्ति की लापरवाही सामने आती है तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य छात्र के भविष्य के साथ इस प्रकार का खिलवाड़ न हो।
क्षेत्र के लोगों का भी कहना है कि शिक्षा विभाग को मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच करानी चाहिए। छात्रों के परिणामों में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी उनके उच्च शिक्षा, छात्रवृत्ति और भविष्य की संभावनाओं को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में दोषियों की जवाबदेही तय करना और पारदर्शी कार्रवाई करना आवश्यक है।
फिलहाल छात्र ने संबंधित अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है। अब देखना यह होगा कि परिषद इस मामले में क्या कदम उठाती है और छात्र को न्याय कब तक मिल पाता है।

