
मूकनायक समाचार | सत्यशील गोंडाने | बालाघाट
मध्यप्रदेश सरकार ने अनुसूचित जनजाति वर्ग के छात्र-छात्राओं को बड़ी राहत देते हुए छात्रावासों एवं आश्रमों में निवासरत विद्यार्थियों की मासिक शिष्यवृत्ति राशि में वृद्धि करने का निर्णय लिया है। जनजातीय कार्य विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार नई शिष्यवृत्ति दरें 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होंगी। इस निर्णय से प्रदेशभर के हजारों जनजातीय विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिलेगा।
जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार जनजातीय विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। विद्यार्थियों की बढ़ती आवश्यकताओं और महंगाई को ध्यान में रखते हुए शिष्यवृत्ति राशि में वृद्धि की गई है, ताकि आर्थिक अभाव उनकी शिक्षा में बाधा न बने।
नई व्यवस्था के तहत अब अनुसूचित जनजाति छात्रावासों एवं आश्रमों में निवासरत विद्यार्थियों की शिष्यवृत्ति दरों का निर्धारण प्रत्येक वर्ष मार्च माह के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के आधार पर किया जाएगा। संशोधित दरें प्रत्येक वर्ष जुलाई माह से स्वतः लागू हो जाएंगी, जिससे विद्यार्थियों को महंगाई के अनुरूप आर्थिक सहायता मिलती रहेगी।
वर्ष 2026-27 के लिए निर्धारित नई दरों के अनुसार छात्रावास एवं आश्रमों में रहने वाले बालक विद्यार्थियों को 1,720 रुपये प्रतिमाह तथा बालिका विद्यार्थियों को 1,770 रुपये प्रतिमाह शिष्यवृत्ति प्रदान की जाएगी। छात्राओं के लिए अधिक राशि निर्धारित कर बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया है।
सरकार का मानना है कि बढ़ी हुई शिष्यवृत्ति से आर्थिक रूप से कमजोर जनजातीय परिवारों के विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री, स्टेशनरी एवं अन्य शैक्षणिक आवश्यकताओं की पूर्ति में सहायता मिलेगी। इससे वे आर्थिक चिंताओं से मुक्त होकर अपनी पढ़ाई पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।
राज्य सरकार के इस निर्णय को जनजातीय विद्यार्थियों के शैक्षणिक, सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। नई शिष्यवृत्ति व्यवस्था से प्रदेश के हजारों विद्यार्थियों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए नया आर्थिक संबल और प्रोत्साहन मिलेगा।

