Monday, July 27, 2026
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प्रशासन की तत्परता से कटंगी तहसील में टला बाल विवाह

महिला एवं बाल विकास विभाग की समय रहते कार्रवाई, परिजनों को कानून की दी जानकारी; लिखित आश्वासन के बाद स्थगित हुआ विवाह

मूकनायक समाचार | सत्यशील गोंडाने | कटंगी (बालाघाट)

बालाघाट जिले के कटंगी विकासखंड में प्रशासन की सतर्कता और महिला एवं बाल विकास विभाग की त्वरित कार्रवाई से एक नाबालिग बालिका का विवाह होने से बच गया। समय पर मिली सूचना पर विभागीय टीम तत्काल विवाह स्थल पहुंची और परिजनों को बाल विवाह प्रतिषेध कानून की जानकारी देते हुए समझाइश दी। अधिकारियों की समझाइश के बाद परिवार ने विवाह तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया तथा बालिका की वैधानिक आयु पूरी होने के बाद ही विवाह कराने का लिखित आश्वासन दिया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार कटंगी मुख्यालय से लगे एक ग्राम में बाल विवाह आयोजित होने की सूचना महिला एवं बाल विकास विभाग को प्राप्त हुई थी। सूचना को गंभीरता से लेते हुए परियोजना अधिकारी मान. पुष्पेंद्र रानाडे के नेतृत्व में विभागीय टीम बिना विलंब के मौके पर पहुंची। टीम में पर्यवेक्षक लक्ष्मी चौधरी, श्रद्धा पटले, संगीता गोपाले तथा विभाग के मान. जयप्रकाश ठाकरे शामिल थे।

विवाह स्थल पर पहुंचकर अधिकारियों ने बालिका और उसके परिजनों से पूछताछ की। जांच के दौरान पता चला कि बालिका एवं उसके माता-पिता मूल रूप से किसी अन्य ग्राम के निवासी हैं और विवाह संपन्न कराने के उद्देश्य से यहां आए थे। पूछताछ में परिजनों ने स्वयं स्वीकार किया कि बालिका की आयु लगभग 17 वर्ष 5 माह है। हालांकि, वे उसकी आयु प्रमाणित करने वाला कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके।

इसके बाद विभागीय अधिकारियों ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2005 के प्रावधानों की विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि 18 वर्ष से कम आयु की बालिका और 21 वर्ष से कम आयु के बालक का विवाह कानूनन अपराध है। उन्होंने समझाया कि बाल विवाह कराने, उसमें सहयोग करने अथवा उसे बढ़ावा देने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें 6 माह तक का कारावास और 1 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।

अधिकारियों ने बाल विवाह से होने वाले सामाजिक, शैक्षणिक और स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभावों पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि कम उम्र में विवाह होने से बालिकाओं की शिक्षा प्रभावित होती है, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तथा उनके भविष्य की संभावनाएं सीमित हो जाती हैं। इसलिए बालिकाओं को शिक्षा और आत्मनिर्भरता का अवसर देना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

प्रशासन की सख्त लेकिन संवेदनशील समझाइश का सकारात्मक असर देखने को मिला। परिजनों ने अपनी भूल स्वीकार करते हुए विवाह समारोह को तत्काल स्थगित करने पर सहमति व्यक्त की। साथ ही उन्होंने विभाग को लिखित रूप से आश्वस्त किया कि बालिका के 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने के बाद ही विधि अनुसार उसका विवाह कराया जाएगा।

महिला एवं बाल विकास विभाग की इस त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की क्षेत्र में व्यापक सराहना हो रही है। स्थानीय लोगों ने कहा कि समय रहते हस्तक्षेप होने से एक बालिका का भविष्य सुरक्षित हुआ है। विभाग ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि कहीं बाल विवाह की जानकारी मिले तो तत्काल प्रशासन या महिला एवं बाल विकास विभाग को सूचित करें, ताकि समय पर कार्रवाई कर बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

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