Tuesday, September 29, 2026
Homeउत्तर प्रदेशमायावती के EVM वाले बयान पर चंद्रशेखर आजाद का पलटवार, नगीना के...

मायावती के EVM वाले बयान पर चंद्रशेखर आजाद का पलटवार, नगीना के जनादेश को लेकर आमने-सामने दोनों नेता

मूकनायक / रिपोर्टर धर्मवीर गौतम / हिंडौन सिटी- नगीना

लखनऊ/नगीना। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती और आजाद समाज पार्टी (ASP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। मायावती ने चंद्रशेखर आजाद की 2024 लोकसभा चुनाव में नगीना से जीत को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। इसके बाद चंद्रशेखर आजाद ने भी पलटवार करते हुए नगीना के मतदाताओं के फैसले को अपना जनादेश बताया।

मायावती ने EVM को लेकर उठाए सवाल

मायावती ने सोमवार को लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान देश में EVM के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर मतदाताओं के मन में किसी तरह का संदेह नहीं रहना चाहिए।

इसी दौरान उन्होंने नगीना लोकसभा सीट का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि चंद्रशेखर आजाद की जीत के पीछे BJP की साजिश और EVM में कथित गड़बड़ी की भूमिका रही। मायावती ने यह भी दावा किया कि चंद्रशेखर का नगीना में पहले से कोई बड़ा राजनीतिक जनाधार नहीं था।

हालांकि EVM में गड़बड़ी और किसी राजनीतिक दल द्वारा साजिश किए जाने का यह आरोप मायावती का दावा है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि इन रिपोर्टों में नहीं हुई है।

युवाओं को लेकर भी साधा निशाना

मायावती ने चंद्रशेखर आजाद की राजनीति के तरीके पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप था कि दलित उत्पीड़न से जुड़े मामलों में आंदोलन और प्रदर्शन के दौरान युवाओं को आगे किया जाता है, जिसके बाद उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज हो सकते हैं।

मायावती ने युवाओं को ऐसे आंदोलनों से सावधान रहने की सलाह दी और कहा कि मुकदमों में फंसने से उनके भविष्य और सरकारी नौकरी की संभावनाओं पर असर पड़ सकता है।

चंद्रशेखर आजाद ने दिया जवाब

मायावती के बयान के बाद चंद्रशेखर आजाद ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि नगीना की जनता ने उन्हें 2024 के लोकसभा चुनाव में बड़ी संख्या में वोट देकर संसद भेजा है और इस जनादेश को किसी साजिश से जोड़ना मतदाताओं के फैसले पर सवाल उठाने जैसा है।

आजाद ने अपने जवाब में यह भी कहा कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है और वह खुद भी चुनाव में अधिक पारदर्शिता तथा बैलेट पेपर की मांग का समर्थन करते रहे हैं। लेकिन उनके मुताबिक नगीना की जनता ने जिस विश्वास के साथ उन्हें चुना, उस फैसले को षड्यंत्र से जोड़ना उचित नहीं है।

‘अब मायावती ने माना कि ASP राजनीतिक ताकत है’

चंद्रशेखर आजाद ने मायावती के बयान को अपनी राजनीतिक मौजूदगी की स्वीकारोक्ति के तौर पर भी पेश किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों की ओर से कभी उनकी राजनीतिक पहचान पर सवाल उठाए जाते थे, आज वही उनके बारे में बात कर रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि उनकी राजनीति किसी व्यक्ति के विरोध पर आधारित नहीं है, बल्कि बहुजन समाज, सामाजिक न्याय और संविधान से जुड़े मुद्दों को उठाने पर केंद्रित है। साथ ही उन्होंने मायावती के प्रति सम्मान कायम रहने की बात कही।

2027 से पहले बढ़ी सियासी हलचल

मायावती और चंद्रशेखर आजाद के बीच यह टकराव ऐसे समय सामने आया है, जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की राजनीतिक तैयारियां तेज हो रही हैं। दोनों नेताओं की राजनीति का एक महत्वपूर्ण आधार दलित और वंचित वर्गों से जुड़े मुद्दे हैं। ऐसे में नगीना चुनाव परिणाम, EVM और दलित युवाओं को लेकर सामने आए बयानों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दिया है।

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments