मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा ✍️✍️
अक्सर लोग केवल अपनों के भले की सोचते हैं, लेकिन सच्चा मानवीय गुण वह है, जो ‘अपने’ और ‘पराए’ के भेद को मिटाकर हर भटके हुए को सही राह दिखाए। यह कार्य केवल दो ही स्तंभों पर टिक सकता है—ज्ञान और प्रेम। ज्ञान व्यक्ति को सही और गलत, न्याय और अन्याय के बीच अंतर करना सिखाता है। जब हम किसी को सही रास्ता दिखाते हैं, तो हम उसे अज्ञानता के अंधेरे से बाहर निकालते हैं। वहीं बिना प्रेम के दिया गया ज्ञान अक्सर कठोर या अहंकार से भरा लग सकता है, लेकिन जब ज्ञान में प्रेम, करुणा और सहानुभूति का मिलन हो जाता है तो वह सीधे सामने वाले के हृदय में उतर जाता है। प्रेम पराए को भी अपना बना लेता है। आज का समाज अक्सर स्वार्थ, ईर्ष्या और दिशाहीनता का शिकार होकर पतन की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में भटके हुए लोगों को सही सलाह और मार्गदर्शन देना समाज में अपराध और नकारात्मकता को रोकता है। जब हम किसी ‘पराए’ को गलत रास्ते पर जाने से रोकते हैं, तो हम अप्रत्यक्ष रूप से एक सुरक्षित और स्वस्थ समाज का निर्माण कर रहे होते हैं । अपनों और परायों को बिना किसी भेदभाव के सही रास्ता दिखाना एक महान सामाजिक और आध्यात्मिक सेवा है। जब ज्ञान की समझ और प्रेम की भावना एक साथ मिलती है, तो समाज का पतन रुक जाता है और चारों ओर खुशहाली व सौहार्द का विस्तार होता है। यही वह मार्ग है जो हमें सच्चे अर्थों में ‘मानव’ बनाता है।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

