मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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गलतियां सभी से होती रहती हैं, लेकिन जो लोग गलतियों से सीख लेकर काम करते हैं और इन्हें दोहराने से बचते हैं, वे बड़ी कामयाबी जरूर हासिल करते हैं। अपनी गलतियों से सीख ना पाना और दूसरों से अपनी तुलना करना, यह दो ऐसी मानसिक बेड़ियाँ हैं, जो इंसान के वर्तमान को पूरी तरह नष्ट कर देती हैं। इसे यदि जीवन की सबसे बड़ी भूल कहा जाए, तो अतिशयोक्ति नहीं होगी । इससे हमारा व्यक्तिगत और बौद्धिक विकास रुक जाता है। इतिहास गवाह है कि महानता गलतियाँ ना करने में नहीं, बल्कि हर गलती को सफलता की सीढ़ी बनाने में है।
आज के परिवर्तनशील माहौल में हम दूसरों के ‘परदे के पीछे’ के संघर्ष को जाने बिना, उनके दिखावे से अपनी असल जिंदगी की तुलना करने लगते हैं। यह तुलना सीधे तौर पर हमारे आत्मसम्मान पर हमला करती है। इससे मन में ईर्ष्या, असंतोष और हीनभावना का जन्म होता है। इस तुलना के चक्कर में हम उस अनमोल समय (वर्तमान) को खो देते हैं, जिसे संवारकर हम खुद का एक बेहतर संस्करण बना सकते थे। जीवन कोई रेस नहीं है, जहाँ आपको दूसरों को हराना है, बल्कि यह एक यात्रा है, जहाँ आपको कल के खुद से बेहतर बनना है। अतीत की गलतियाँ ‘अनुभव’ हैं और वर्तमान ‘अवसर’। यदि हम दूसरों को देखना छोड़कर खुद की कमियों को सुधारने में लग जाएँ, तो वर्तमान को बर्बाद होने से बचाया जा सकता है और यही सच्चे जीवन की शुरुआत है।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

