“न्याय दो या प्राण लो” पदयात्रा का दूसरा दिन: केशकाल घाटी पार कर कांकेर पहुँचा जनसंघर्ष
मूकनायक
कमलेश लवहात्रै छत्तीसगढ़ प्रभारी
कांकेर, 28 मई 2026।
“न्याय दो या प्राण लो” के बुलंद नारों के साथ निकली ऐतिहासिक पदयात्रा का दूसरा दिन आज केशकाल घाटी होते हुए जिला कांकेर पहुँचा। यह संघर्ष यात्रा माता लखमनी बघेल जी को न्याय दिलाने एवं उनकी पैतृक जमीन को बचाने की लड़ाई को जनआंदोलन का रूप दे रही है।
बस्तर से रायपुर मुख्यमंत्री निवास तक निकाली जा रही यह पदयात्रा अब केवल एक परिवार की लड़ाई नहीं रह गई है, बल्कि यह अन्याय, शोषण और प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ आम जनता की आवाज बन चुकी है। यात्रा में शामिल लोगों ने शासन से सवाल किया कि आखिर एक गरीब और पीड़ित महिला को अपने अधिकार और जमीन के लिए सड़कों पर उतरने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ा?
पदयात्रा के दौरान जगह-जगह स्थानीय लोगों ने समर्थन देते हुए कहा कि यदि समय रहते शासन ने न्याय नहीं दिया, तो यह आंदोलन और अधिक व्यापक रूप ले सकता है। यात्रा में शामिल सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं भीम आर्मी छत्तीसगढ़ के पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि जब तक माता लखमनी बघेल जी को न्याय नहीं मिलता, तब तक यह संघर्ष रुकने वाला नहीं है।
यात्रा के दौरान गूंजते रहे नारे—
📢 “न्याय दो या प्राण लो!”
📢 “लखमनी बघेल को न्याय दो!”
📢 “संघर्ष ही अधिकार दिलाता है!”
आंदोलनकारियों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर तत्काल न्याय सुनिश्चित किया जाए तथा पीड़ित परिवार को सुरक्षा और कानूनी संरक्षण प्रदान किया जाए।
यह पदयात्रा अब सामाजिक न्याय, संविधान और अधिकारों की रक्षा की प्रतीक बनती जा रही है।
जय भीम ✊
जय संविधान 📘
— भीम आर्मी छत्तीसगढ़




