



राजस्थान के भीलवाड़ा में पांच दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में मिल रहा आधुनिक और पारंपरिक खेती का ज्ञान
मूकनायक समाचार/सत्यशील गोंडाने
बालाघाट
बालाघाट। बालाघाट जिले के किसान इन दिनों गो आधारित जैविक एवं प्राकृतिक खेती की उन्नत तकनीकों को सीखने के लिए राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में आयोजित पांच दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं। यह प्रशिक्षण 27 मई 2026 से 31 मई 2026 तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें देशभर के कृषि विशेषज्ञ किसानों को प्राकृतिक एवं टिकाऊ खेती की आधुनिक और पारंपरिक पद्धतियों की जानकारी दे रहे हैं।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को रासायनिक खेती के दुष्परिणामों से अवगत कराते हुए गो आधारित जैविक खेती, देसी संसाधनों के उपयोग और पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करना है। प्रशिक्षण के प्रथम दिवस पर विशेषज्ञों ने जीव संरक्षण, रासायनिक खेती के दुष्प्रभाव, देसी बीजों का महत्व, कीट नियंत्रण, पोषण वाटिका निर्माण, मिश्रित खेती, पशुपालन, वर्षा जल संचयन तथा जैव विविधता जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी।
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि प्राकृतिक खेती केवल उत्पादन का माध्यम नहीं है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, जल संरक्षण करने और मानव स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने तथा खेती को आत्मनिर्भर बनाने के उपायों की जानकारी भी दी जा रही है।
प्रशिक्षण शिविर में शामिल किसानों ने प्राकृतिक खेती के व्यावहारिक पहलुओं को समझते हुए देसी बीज संरक्षण, जैविक खाद निर्माण और पशुपालन आधारित कृषि मॉडल में विशेष रुचि दिखाई। किसानों ने कृषि नवाचारों एवं टिकाऊ खेती की नई तकनीकों के संबंध में विशेषज्ञों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
विशेषज्ञों का कहना है कि गो आधारित जैविक एवं प्राकृतिक खेती भविष्य की आवश्यकता है। इससे रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होगी, मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार आएगा तथा किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। यह प्रशिक्षण किसानों को आत्मनिर्भर, स्वास्थ्यवर्धक और पर्यावरण अनुकूल कृषि व्यवस्था की ओर अग्रसर करने में महत्वपूर्ण साबित होगा।

