Tuesday, September 29, 2026
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खैरलांजी में अतिक्रमण पर सियासी संग्राम बैंक भूमि विवाद को लेकर दो जिला पंचायत सदस्य आमने-सामने, राजस्व कार्रवाई से मचा हड़कंप

मूकनायक समाचार | सत्यशील गोंडाने
बालाघाट

खैरलांजी नगर इन दिनों अतिक्रमण हटाओ अभियान को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बना हुआ है। सेवा सहकारी समिति मर्यादित बैंक की भूमि से अतिक्रमण हटाने पहुंची राजस्व विभाग की टीम की कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र में हलचल मचा दी। मामले ने उस समय तूल पकड़ लिया जब जिला पंचायत सदस्य मधु ऋषि शुक्ला और जिला पंचायत सदस्य सुनीता मानसिंह बहेटवार आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते प्रशासनिक कार्रवाई राजनीतिक विवाद में बदल गई और नगर में चर्चा का प्रमुख विषय बन गई।

जानकारी के अनुसार सेवा सहकारी समिति मर्यादित बैंक परिसर की भूमि पर वर्षों से अतिक्रमण फैला हुआ है। बैंक परिसर में बाउंड्रीवाल निर्माण के लिए लगभग चार लाख रुपये की राशि स्वीकृत कराई गई थी। निर्माण कार्य शुरू करने से पहले भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराना आवश्यक बताया गया, जिसके बाद खैरलांजी तहसील प्रशासन राजस्व अमले और पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचा।

अचानक शुरू हुई कार्रवाई से अतिक्रमणकारियों और आसपास के दुकानदारों में हड़कंप मच गया। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर जमा हो गए। कुछ ही देर में बहस, आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई।

मौके पर जिला पंचायत सदस्य मधु ऋषि शुक्ला ने प्रशासनिक कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि बैंक की भूमि सरकारी संपत्ति है और वर्षों से उस पर धीरे-धीरे अतिक्रमण होता गया। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक संरक्षण के चलते बैंक की जमीन पर कब्जे बढ़ते गए और अब निर्माण कार्य प्रारंभ होने पर वास्तविक स्थिति सामने आई है।

उन्होंने कहा कि यदि समय रहते अतिक्रमण हटाया गया होता तो आज विवाद की स्थिति पैदा नहीं होती। उनके अनुसार बैंक परिसर के आसपास बने कुछ पक्के निर्माण और दुकानें आम नागरिकों के आवागमन में भी बाधा बन रही हैं। उन्होंने प्रशासन से पूरी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की।

वहीं दूसरी ओर जिला पंचायत सदस्य सुनीता मानसिंह बहेटवार ने कार्रवाई का विरोध करते हुए प्रशासन पर पक्षपातपूर्ण रवैये का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बैंक के सामने वर्षों से गरीब और छोटे दुकानदार अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। अचानक कार्रवाई कर उन्हें हटाना उचित नहीं है।

उन्होंने मांग की कि पूरे क्षेत्र का वैज्ञानिक सीमांकन कराया जाए और उसके बाद ही निष्पक्ष कार्रवाई हो। उनका कहना था कि यदि दस्तावेजों में बैंक की भूमि 38 डिसमिल दर्ज है तो प्रशासन पहले यह स्पष्ट करे कि शेष भूमि कहां गई। केवल छोटे दुकानदारों को हटाकर समस्या का समाधान नहीं होगा। यदि बड़े अतिक्रमण मौजूद हैं तो उन पर भी समान रूप से कार्रवाई की जानी चाहिए।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोनों जनप्रतिनिधियों के बीच मौके पर तीखी बहस हुई। स्थिति तनावपूर्ण होने लगी तो तहसीलदार तीरथ प्रसाद अधारिया और पुलिस अधिकारियों को हस्तक्षेप करना पड़ा। अधिकारियों ने दोनों पक्षों को समझाइश देकर स्थिति नियंत्रित की।

इस पूरे विवाद के बीच सबसे बड़ा सवाल बैंक की वास्तविक भूमि को लेकर खड़ा हो गया है। दस्तावेजों के अनुसार बैंक की भूमि लगभग 38 डिसमिल बताई जा रही है, जबकि मौके पर अधिकारियों को लगभग 20 डिसमिल भूमि ही उपलब्ध दिखाई दी। इसी अंतर ने विवाद को और गहरा कर दिया है।

घटनास्थल पर मौजूद महिलाओं और व्यापारियों ने भी प्रशासन के सामने अपनी चिंता व्यक्त की। कई महिलाओं ने कहा कि वे वर्षों से छोटी दुकानों के माध्यम से परिवार चला रही हैं। यदि उन्हें हटाया गया तो रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना कार्रवाई न करने की मांग की।

राजस्व विभाग की ओर से तहसीलदार तीरथ प्रसाद अधारिया ने बताया कि प्रारंभिक जांच में भूमि सीमांकन और अभिलेखों में अंतर सामने आया है। पुराने नक्शों और रिकॉर्ड का परीक्षण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विस्तृत मापन और जांच के बाद वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन किसी के साथ पक्षपात नहीं करेगा।

तहसीलदार ने यह भी कहा कि मौके पर तत्काल सीमांकन संभव नहीं था क्योंकि पुराने राजस्व अभिलेखों का परीक्षण आवश्यक है। जल्द ही विस्तृत सर्वे और सीमांकन कराया जाएगा ताकि बैंक की वास्तविक भूमि का निर्धारण किया जा सके।

घटना के बाद खैरलांजी नगर में राजनीतिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। लोग इसे केवल अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं बल्कि स्थानीय राजनीति की शक्ति परीक्षा के रूप में भी देख रहे हैं। दोनों जनप्रतिनिधियों के समर्थक अपने-अपने पक्ष में माहौल बनाने में जुट गए हैं। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर में लंबे समय से कई स्थानों पर अतिक्रमण फैला हुआ है, लेकिन कार्रवाई चुनिंदा स्थानों पर ही होती है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि यदि अभियान चलाया जाए तो पूरे नगर में समान और निष्पक्ष कार्रवाई हो ताकि किसी प्रकार के पक्षपात की गुंजाइश न रहे।

खैरलांजी की इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सरकारी जमीनों पर बढ़ते अतिक्रमण के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है। वर्षों तक प्रशासनिक उदासीनता और राजनीतिक संरक्षण के चलते ऐसे विवाद जन्म लेते हैं और जब कार्रवाई होती है तो सबसे अधिक असर गरीब और छोटे व्यापारियों पर पड़ता है।

अब पूरे जिले की नजर राजस्व विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि निष्पक्ष सीमांकन और पारदर्शी जांच होती है तो मामला शांत हो सकता है, लेकिन यदि कार्रवाई एकतरफा हुई तो आने वाले दिनों में विवाद और गहराने की संभावना बनी रहेगी। खैरलांजी का यह प्रकरण अब जिलेभर में चर्चा का विषय बन चुका है और लोग प्रशासन से न्यायपूर्ण तथा पारदर्शी कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।

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