



मूकनायक समाचार / सत्यशील गोंडाने
बालाघाट
बालाघाट। 23 अप्रैल 2026 को जिले में भारत मुक्ति मोर्चा एवं राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के संयुक्त नेतृत्व में आयोजित एक दिवसीय धरना एवं भारत बंद का असर बालाघाट जिले में मिला-जुला देखने को मिला। सामाजिक न्याय, आरक्षण की सुरक्षा, निजीकरण के विरोध और बहुजन समाज के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर यह आंदोलन किया गया।
जिले के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने रैली, धरना और नारेबाजी के माध्यम से अपनी आवाज बुलंद की। शहर के प्रमुख चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर सुबह से ही आंदोलनकारियों की उपस्थिति रही। हाथों में झंडे और बैनर लिए कार्यकर्ता “जय भीम”, “संविधान बचाओ” और “बहुजन एकता जिंदाबाद” जैसे नारों के साथ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते नजर आए।
धरना स्थल पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने केंद्र एवं राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि निजीकरण की नीतियों के कारण आरक्षण व्यवस्था कमजोर हो रही है, जिससे बहुजन समाज के युवाओं के अवसर सीमित हो रहे हैं। साथ ही सामाजिक न्याय की मूल भावना की अनदेखी किए जाने का आरोप भी लगाया गया।
वक्ताओं ने कहा कि यह बंद केवल विरोध नहीं, बल्कि जागरूकता का अभियान है। समाज के सभी वर्गों को अपने अधिकारों के प्रति सजग होना आवश्यक है। इस दौरान संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों को स्मरण करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया गया।
बंद के दौरान शहर के कुछ बाजारों में आंशिक रूप से दुकानें बंद रहीं, जबकि कई स्थानों पर सामान्य गतिविधियां जारी रहीं। परिवहन व्यवस्था पर भी सीमित असर देखने को मिला। कुछ स्थानों पर रैलियों के कारण यातायात प्रभावित हुआ, लेकिन अधिकांश स्थानों पर स्थिति सामान्य रही। पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे, जिससे कहीं भी अप्रिय स्थिति उत्पन्न नहीं हुई।
ग्रामीण क्षेत्रों में बंद का प्रभाव अपेक्षाकृत कम रहा और जनजीवन सामान्य बना रहा। हालांकि कुछ गांवों में कार्यकर्ताओं ने रैली निकालकर लोगों को आंदोलन के उद्देश्यों से अवगत कराया। इस दौरान युवाओं, छात्रों और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी भी देखने को मिली।
महिलाओं ने शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हुए सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की। वहीं कई सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों ने भी आंदोलन को समर्थन देते हुए संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की आवश्यकता बताई।
हालांकि कुछ नागरिकों ने बंद के कारण हुई असुविधा पर नाराजगी जताई और ऐसे आंदोलनों के वैकल्पिक तरीकों पर विचार करने की बात कही। इसके जवाब में आंदोलनकारियों ने कहा कि मांगों पर ध्यान नहीं दिए जाने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
दिनभर चले इस कार्यक्रम के बाद शाम तक स्थिति सामान्य हो गई। बाजार खुल गए और यातायात पूरी तरह बहाल हो गया। आंदोलनकारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से कार्यक्रम का समापन करते हुए भविष्य में भी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।
कुल मिलाकर, बालाघाट में आयोजित भारत बंद का प्रभाव सीमित लेकिन संदेशपूर्ण रहा, जिसमें बहुजन समाज की एकजुटता और अधिकारों के प्रति जागरूकता स्पष्ट रूप से देखने को मिली।

