
मूकनायक समाचार / सत्यशील गोंडाने
बालाघाट
बालाघाट ।मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक पारदर्शिता और विभागीय निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बालाघाट और देवास जिलों में एक ही शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर दो अलग-अलग व्यक्तियों द्वारा डॉक्टर के रूप में वर्षों से सेवा देने का मामला उजागर हुआ है। इस प्रकरण को “डबल डॉक्टर घोटाला” के रूप में देखा जा रहा है।
15 वर्षों से जारी था मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दोनों जिलों में पदस्थ डॉक्टरों के नाम, पिता का नाम, जन्मतिथि और शैक्षणिक योग्यता तक समान पाई गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि दोनों ही लगभग 15 वर्षों से सरकारी सेवा में कार्यरत हैं और नियमित रूप से वेतन भी प्राप्त कर रहे हैं। इस दौरान विभाग द्वारा दस्तावेजों का समुचित सत्यापन नहीं किया गया।
ऐसे हुआ खुलासा
सूत्रों के अनुसार, दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान विसंगतियां सामने आने पर मामला उजागर हुआ। बालाघाट जिले के बिरसा क्षेत्र में पदस्थ एक डॉक्टर वर्ष 2008 से सेवा दे रहे हैं, वहीं देवास जिले में भी समान पहचान वाले दूसरे डॉक्टर के कार्यरत होने की जानकारी मिली। दोनों के दस्तावेजों की जांच में एक जैसी एमबीबीएस डिग्री और प्रमाण पत्र पाए गए।
विभागीय लापरवाही या संगठित गड़बड़ी?
यह मामला स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। सवाल यह है कि इतने वर्षों तक इस तरह की गंभीर विसंगति सामने क्यों नहीं आई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नियमित सत्यापन होता, तो यह स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती।
करोड़ों का वेतन भुगतान
दोनों व्यक्तियों को वर्षों तक वेतन का भुगतान किया गया। अनुमान के अनुसार, 15 वर्षों में यह राशि करोड़ों रुपये तक पहुंच सकती है। ऐसे में सरकारी धन के दुरुपयोग और वित्तीय जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
असली डॉक्टर कौन?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि असली डॉक्टर कौन है और किसने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी प्राप्त की। विभाग द्वारा सेवा पुस्तिका, नियुक्ति प्रक्रिया और शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की जांच की जा रही है।
अधिकारियों का बयान
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि मामला संज्ञान में आते ही जानकारी एकत्र कर उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। विभागीय जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।
जनता में आक्रोश
मामले के सामने आने के बाद आम जनता में नाराजगी और अविश्वास देखा जा रहा है। लोगों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
सुधार की जरूरत
विशेषज्ञों ने इस घटना के बाद कई सुधारात्मक कदम सुझाए हैं, जिनमें—
दस्तावेजों का नियमित सत्यापन
डिजिटल रिकॉर्ड प्रणाली को मजबूत करना
नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता
जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करना
बालाघाट और देवास में सामने आया यह “डबल डॉक्टर घोटाला” केवल एक अनियमितता नहीं, बल्कि सिस्टम की गंभीर खामियों का संकेत है। अब सबकी निगाहें जांच पर टिकी हैं कि सच्चाई कब सामने आती है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।
मूकनायक समाचार इस मामले की हर अपडेट पर नजर बनाए हुए है।

