मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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दूसरों को सुनना सिर्फ शिष्टाचार नहीं, बल्कि संवाद की कला है, जो शांति और समझ को बढ़ावा देती है। कई बार व्यक्ति सिर्फ अपनी बात कहने के लिए मन की भड़ास निकालना चाहता है और जब उसे पूरा मौका मिलता है, तो उसका मानसिक तनाव कम हो जाता है और वह शांत होकर तर्कपूर्ण बात करने के लिए तैयार हो जाता है ।
इसके विपरीत बीच में बात काटने से अक्सर बहस की शुरूआत होती है। रुककर सुनने से हमें सोचने का समय मिलता है, जिससे हम ‘रिएक्ट’ करने के बजाय समझदारी से ‘रिस्पोन्स’ दे पाते हैं। मौन रहकर सुनना सामने वाले के प्रति संवेदनशीलता दिखाने का सबसे सशक्त तरीका है। दूसरों की बात को बीच में काटे बिना ध्यान से सुनना आधे विवादों को खत्म कर देता है ।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक हरियाणा

