Thursday, June 11, 2026
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इंसान सामाजिक प्राणी है, लेकिन मानवता के गुणों को धारण करना ही उसे बनाता है विशेष

मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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सामाजिक प्राणी होने के नाते हम दूसरों के साथ जुड़े रहते हैं, लेकिन एक ‘मानव’ होने के नाते हम दूसरों के दुख दर्द को महसूस करते हैं । जब आप किसी अपरिंचित की पीड़ा देखकर उसे दूर करने का प्रयास करते हैं, तब आप प्रकृति के सामान्य नियमों से ऊपर उठकर मानवता को धारण करते हैं। जीव-जंतू भी समूह में रहते हैं और अपने कुन्बे की रक्षा करते हैं । मगर इंसान की विशेषता तब झलकती है, जब वह अपने निजी लाभ को छोड़कर दूसरों की भलाई के लिए कार्य करता हैं।
त्याग और सेवा ही वे गुण हैं, जो किसी साधारण व्यक्ति को ‘महापुरुष’ की श्रेणी में खड़ा कर देते हैं। समाज में रहना इंसान की आवश्यकता हैं, लेकिन मानवता उसका आभूषण भी है। बिना मानवीय गुणों के इंसान और जानवर में कोई अंतर नहीं है। इसलिए, सामाजिक होने के साथ-साथ, मानवता को धारण करना ही हमें ‘मनुष्य’ का दर्जा देता है।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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