मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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आजकल लोग अपनी सादगी के बजाय ब्रांडेड कपड़े, महंगी कारों और आलीशान घरों के जरिए अपना सामाजिक स्तर दिखाते हैं, जिससे रिश्तों में ईमानदारी की कमी हो रही है । फेसबुक, इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर लोग अपनी खुशियों, उपलब्धियों और महंगी वस्तुओं की तस्वीरों को बहुत बड़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं, जो अक्सर हकीकत से दूर एक बनावटी संसार होता है। अपनी हैसियत से बाहर जाकर महंगे गैजेट्स, ब्रांडेड कपड़े और आलीशान शादियों पर खर्च करना एक स्टेटस सिंबल बन गया है। “लोग क्या कहेंगे” के डर से इंसान कर्ज के जाल में फंस रहा है ।
दिखावा एक ऐसा बुलबुला है, जो बहुत जल्दी फूट जाता है। वास्तविक सम्मान आपके पद, ब्रांडेड कपड़ों या बैंक बैलेंस से नहीं, बल्कि आपके व्यवहार और सादगी से मिलता है। वहीं दिखावा एक ऐसा मुखौटा भी है जिसे पहनकर इंसान कुछ पल की वाहवाही तो लूट सकता है, लेकिन मानसिक सुकून कभी नहीं पा सकता। सच्ची खुशी दिखावे में नहीं, बल्कि वास्तविकता और सादगी में है। हमें यह समझने की जरूरत है कि हमारी पहचान हमारे कपड़ों या गैजेट्स से नहीं, बल्कि हमारे चरित्र और व्यवहार से होती है। यदि हम दिखावे के बजाय व्यक्तित्व निर्माण पर ध्यान दें, तभी एक स्वस्थ समाज का निर्माण संभव है ।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

