Tuesday, September 29, 2026
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पेरियार जयंती पर बौद्ध पद्धति से के.एल. हेल्थ सेंटर एवं फार्मा क्लीनिक का शुभारंभ

बुद्ध वंदना, त्रिशरण एवं पंचशील के साथ हुआ कार्यक्रम; पेरियार के सामाजिक संघर्ष और आत्मसम्मान आंदोलन पर हुई विचार संगोष्ठी

मूकनायक | संपादक : डॉ. जी.पी. मानव, उन्नाव (उत्तर प्रदेश)
उन्नाव। तहसील हसनगंज क्षेत्र के ग्राम चांदपुर झलिहई में पेरियार ई.वी. रामासामी नायकर की जयंती के अवसर पर के.एल. हेल्थ सेंटर एवं फार्मा क्लीनिक का शुभारंभ बौद्ध पद्धति से आयोजित विचार संगोष्ठी के साथ किया गया। मानव विकास संस्थान, उत्तर प्रदेश के पूर्व तहसील अध्यक्ष सुनील कुमार द्वारा अपने पुत्र आश्वेन्द्र प्रताप सिंह के लिए शुरू किए गए इस स्वास्थ्य केंद्र के उद्घाटन समारोह में मानव विकास संस्थान, उत्तर प्रदेश के प्रमुख डॉ. जी.पी. मानव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ पूज्य भंते विवेक दीप एवं भंते अशोक दीप के मार्गदर्शन में तथागत भगवान गौतम बुद्ध, बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर एवं पेरियार ई.वी. रामासामी नायकर के छायाचित्रों पर मुख्य अतिथि सहित उपस्थित गणमान्य नागरिकों द्वारा पुष्पार्पण के साथ हुआ। इसके बाद उपस्थित लोगों ने बुद्ध वंदना, त्रिशरण एवं पंचशील का पाठ ग्रहण किया।
प्रसाद वितरण के उपरांत “पेरियार रामासामी नायकर एवं जाति, अंधविश्वास और सामाजिक गुलामी के विरुद्ध आत्मसम्मान की आवाज” विषय पर विचार संगोष्ठी आयोजित की गई।

संगोष्ठी में राकेश विद्यार्थी ने पेरियार ई.वी. रामासामी नायकर के जीवन, सामाजिक संघर्ष और उनके विचारों पर प्रकाश डाला। आर.आर. बौद्ध ने पेरियार द्वारा चलाए गए आत्मसम्मान आंदोलन के उद्देश्य एवं उसके सामाजिक प्रभाव पर विस्तार से विचार व्यक्त किए।
श्याम चंद्र वर्मा ने कहा कि पेरियार ने धार्मिक कर्मकांड, अंधविश्वास, सामाजिक कुरीतियों तथा जन्म आधारित ऊंच-नीच की व्यवस्था के विरुद्ध जीवनभर संघर्ष किया। उन्होंने समाज में समानता, तर्कशीलता और आत्मसम्मान की भावना को मजबूत करने का निरंतर प्रयास किया।

मुख्य अतिथि डॉ. जी.पी. मानव ने कहा कि पेरियार ई.वी. रामासामी नायकर आधुनिक भारत के प्रमुख सामाजिक क्रांतिकारियों में थे। उन्होंने अपना जीवन जाति व्यवस्था, सामाजिक वर्चस्व, अंधविश्वास, पाखंड, रूढ़ियों और सामाजिक असमानता के विरुद्ध संघर्ष में समर्पित किया। वे तर्कशीलता, मानवतावाद और आत्मसम्मान के प्रबल समर्थक थे।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक स्वतंत्रता के साथ सामाजिक स्वतंत्रता भी आवश्यक है। जब तक मनुष्य जाति, वर्ण, अंधविश्वास तथा जन्म आधारित ऊंच-नीच की मानसिकता से मुक्त नहीं होता, तब तक स्वतंत्रता अधूरी रहती है। पेरियार का सामाजिक चिंतन समानता, आत्मसम्मान और मानवीय गरिमा के प्रश्नों को केंद्र में रखता था।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. दिनेश कुमार ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि तहसील हसनगंज क्षेत्र में बौद्ध रीति-रिवाज से इस प्रकार का यह पहला कार्यक्रम है। उन्होंने कहा कि सामान्य परिवार से शुरू हुआ यह मेडिकल स्टोर क्षेत्र के लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवा का माध्यम बनेगा। उन्होंने लोगों से अपने जीवन और सामाजिक कार्यों में तर्क, विवेक एवं बौद्धिक दृष्टिकोण अपनाने की अपील की।

कार्यक्रम के मुख्य आयोजक सुनील कुमार ने मुख्य अतिथि, भंतेगण, वक्ताओं, गणमान्य नागरिकों तथा उपस्थित सभी लोगों का आभार व्यक्त किया और कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी लोगों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस अवसर पर कमलेश कुमार, डॉ. रमाशंकर, मुजीब खान, रामस्वरूप, अनुज कुमार, ब्रिज किशोर तथा डॉ. मेवालाल लोधी सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रीय नागरिक उपस्थित रहे।

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