Tuesday, September 29, 2026
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भावांतर योजना के खिलाफ जिलेभर में किसान गर्जना! तहसील कार्यालयों पर गूंजी किसानों की बुलंद आवाज

प्रदेश अध्यक्ष अरविंद चौधरी और जिलाध्यक्ष रामकुमार नगपुरे के नेतृत्व में मोर्चा — किसानों ने कहा, भावांतर नहीं, फसल का उचित दाम चाहिए

मूकनायक समाचार —/ सत्यशील गोंडाने —/ बालाघाट (मध्यप्रदेश)

बालाघाट। किसानों की फसल के उचित मूल्य और उनके आर्थिक अधिकारों को लेकर किसान गर्जना संगठन ने एक बार फिर जिलेभर में अपनी आवाज बुलंद कर दी है। भावांतर योजना को लेकर बालाघाट जिले की विभिन्न तहसीलों में किसान एवं संगठन के पदाधिकारी तहसील कार्यालयों तक पहुंचे और सरकार की कृषि नीति पर सवाल खड़े किए।

किसान गर्जना संगठन के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद चौधरी एवं जिलाध्यक्ष रामकुमार नगपुरे के नेतृत्व में किसानों ने विभिन्न तहसील क्षेत्रों में अपनी मांगों को मजबूती से उठाते हुए कहा कि किसान को उसकी उपज का वास्तविक और लाभकारी मूल्य मिलना चाहिए। किसानों का कहना है कि केवल भावांतर के सहारे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं हो सकती।

*तहसील-तहसील ‘गाव गाव पहुंच किसानों की आवाज

भावांतर योजना के विरोध को लेकर जिले के विभिन्न तहसील कार्यालयों में किसानों और संगठन के कार्यकर्ताओं की सक्रियता दिखाई दी। किसान गर्जना संगठन ने इस मुद्दे को गांव से लेकर तहसील स्तर तक पहुंचाने का अभियान तेज किया है।

संगठन का कहना है कि किसान पूरे साल मेहनत कर फसल तैयार करता है। खाद, बीज, सिंचाई, बिजली, मजदूरी और डीजल की बढ़ती लागत के बीच यदि उसे उसकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिलता तो खेती घाटे का सौदा बनती चली जाएगी।

°प्रदेश अध्यक्ष अरविंद चौधरी की बुलंद हुंकार*

किसान गर्जना संगठन के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद चौधरी ने किसानों की आवाज को प्रदेश स्तर तक पहुंचाने का आह्वान करते हुए कहा कि किसानों के हितों से जुड़े मुद्दों पर संगठन पीछे हटने वाला नहीं है। भावांतर योजना को लेकर किसानों की जो चिंताएं हैं, उन्हें सरकार तक मजबूती से पहुंचाया जाएगा।

उन्होंने किसानों से संगठित होकर अपने अधिकारों की आवाज उठाने का आह्वान किया।

जिलाध्यक्ष रामकुमार नगपुरे ने संभाली जिले की कमान

जिला स्तर पर किसान गर्जना संगठन के जिलाध्यक्ष रामकुमार नगपुरे के नेतृत्व में संगठन ने तहसील स्तर पर किसानों को जोड़ते हुए आंदोलन को मजबूती देने का प्रयास किया। नगपुरे ने कहा कि किसान किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि अपनी मेहनत की फसल का उचित मूल्य पाने के लिए आवाज उठा रहा है।

उन्होंने कहा कि किसान की समस्याओं को केवल कागजों और घोषणाओं तक सीमित रखने के बजाय सरकार को जमीनी स्तर पर किसानों की स्थिति समझनी होगी।

भावांतर नहीं, फसल का उचित मूल्य चाहिऐ

किसान गर्जना संगठन की प्रमुख मांग है कि किसानों को उनकी फसल का ऐसा मूल्य मिले जिससे खेती की लागत निकलने के साथ किसान के परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो सके।

संगठन ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर गांव-गांव और तहसील-तहसील आवाज उठाई जाएगी। संगठन का कहना है कि जब तक किसानों की समस्याओं पर ठोस समाधान नहीं निकलता, तब तक आंदोलन और जनजागरण का सिलसिला जारी रहेगा।

सरकार के सामने किसानों की सीधी चुनौती

बालाघाट जिले में भावांतर योजना को लेकर किसान गर्जना संगठन की सक्रियता ने एक बार फिर किसानों के कृषि मूल्य और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को बहस के केंद्र में ला दिया है।

अब सवाल यह है कि किसानों की तहसील से गाँव गावं स्तर तक पहुंची इस आवाज पर सरकार और प्रशासन क्या कदम उठाते हैं? किसान संगठनों का कहना है कि किसान की मेहनत का सम्मान तभी होगा, जब उसकी फसल का उचित मूल्य उसके हाथ में पहुंचे।

मूकनायक की सीधी बात

किसान की फसल, किसान की मेहनत और किसान का हक — सवाल सिर्फ भावांतर का नहीं, बल्कि खेती को लाभ का धंधा बनाने की वास्तविक नीति का है।

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