मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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किसी भी समर्थ और जीवंत लोकतंत्र की नींव चार प्रमुख स्तंभों पर टिकी होती है—निष्पक्ष मीडिया, स्वतंत्र न्यायपालिका, मजबूत विपक्ष और जागरूक जनता। यदि इनमें से एक भी स्तंभ अपना कर्तव्य भूल जाए तो लोकतंत्र का ढांचा चरमराने लगता है । बिका हुआ पत्रकार या गोदी मीडिया सच को दबाकर सत्ता की चाटुकारिता में लीन हो जाता है, जिससे जनता तक सही सूचनाएं नहीं पहुँच पातीं। न्यायपालिका का डरना या दबाव में आना नागरिकों के मौलिक अधिकारों और संविधान की सुरक्षा पर सीधा प्रहार करता है। एक गूंगा और दिशाहीन विपक्ष सत्ता पर नियंत्रण रखने और उसकी मनमानी को रोकने में पूरी तरह विफल साबित होता है।
लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति जनता में निहित होती है। तथापि, सबसे बड़ा संकट जनता की निद्रा और अजागरूकता है। जब आम नागरिक अपने अधिकारों, कर्तव्यों और सामाजिक मुद्दों के प्रति उदासीन हो जाते हैं, तब सत्ता निरंकुश होने लगती है। जब तक नागरिक सवाल नहीं पूछेंगे, तब तक ना तो मीडिया सुधरेगा और ना ही विपक्ष जागेगा क्योंकि जब मिडिया बिकी हुई हो, न्याय डरा हुआ हो, विरोध मौन हो और जनता संवेदनहीन हो, तो लोकतंत्र केवल नाम का रह जाता है। लोकतंत्र केवल चुनाव जीतने या सरकार बनाने का नाम नहीं है। यदि हम अपने तंत्र को जीवंत रखना चाहते हैं तो मीडिया को निर्भीक, न्यायपालिका को निष्पक्ष, विपक्ष को प्रखर और जनता को निरंतर जागरूक रहना ही होगा।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

