Tuesday, September 29, 2026
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जब लोग अंधविश्वास, काल्पनिक या भावनात्मक मुद्दों पर लड़ते हैं, तो शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबी और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दे जाते हैं पीछे छूट

मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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जब लोग अंधविश्वास, काल्पनिक या भावनात्मक मुद्दों पर लड़ते हैं, तो समाज का ध्यान उन वास्तविक समस्याओं से भटक जाता है, जो मानव जीवन के विकास के लिए अनिवार्य हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबी और रोजगार किसी भी प्रगतिशील समाज के बुनियादी स्तंभ हैं। जब मुख्यधारा की चर्चाओं और राजनीतिक बहसों में धार्मिक कट्टरता, जातिगत श्रेष्ठता या काल्पनिक ऐतिहासिक विवाद हावी हो जाते हैं, तो इन बुनियादी मुद्दों पर होने वाला निवेश और प्रयास पीछे छूट जाते हैं।भावनात्मक और अंधविश्वास से जुड़े मुद्दे अक्सर लोगों को वैचारिक रूप से विभाजित करते हैं। इस विभाजन के कारण नागरिक अपने मौलिक अधिकारों, जैसे कि बेहतर स्कूल, आधुनिक अस्पताल, रोजगार के अवसर और गरीबी उन्मूलन की योजनाओं पर सवाल उठाना बंद कर देते हैं।
अक्सर सरकारें और नीति निर्माता भी जनता के मूड को भांपकर लोक-लुभावन या भावनात्मक फैसलों को प्राथमिकता देने लगते हैं, जिससे वास्तविक विकास बजट और नीतियों में उपेक्षित रह जाता है। एक जागरूक समाज को यह समझना होगा कि भविष्य की नींव वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आर्थिक संपन्नता पर टिकी है। जब तक नागरिक काल्पनिक विवादों को छोड़कर रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा और चिकित्सा जैसे मूलभूत अधिकारों को अपनी प्राथमिकता नहीं बनाएंगे, तब तक कोई भी राष्ट्र वास्तविक प्रगति नहीं कर सकता। विकास के लिए जरूरी है कि हम तात्कालिक भावनाओं से ऊपर उठकर तार्किक और जनहित के मुद्दों पर एकजुट हों।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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