Tuesday, September 29, 2026
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लखनऊ के ईको गार्डन में पंचायत सहायकों का अनिश्चितकालीन धरना, सम्मानजनक वेतन और सेवा सुरक्षा की मांग

मूकनायक/राजेश कुमार जिला ब्यूरो चीफ बस्ती/उत्तर प्रदेश

पांच वर्षों से महज 6 हजार रुपये मासिक मानदेय पर सेवाएं देने वाले पंचायत सहायकों में आक्रोश, चार सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

लखनऊ, 7 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश के हजारों पंचायत सहायकों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर राजधानी लखनऊ के ईको गार्डन में सोमवार से अनिश्चितकालीन विशाल धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। पंचायत सहायक यूनियन कर्मचारी उत्तर प्रदेश तथा सोशल कम डाटा एंट्री ऑपरेटर वेलफेयर एसोसिएशन के आह्वान पर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से पंचायत सहायक लखनऊ पहुंचे हैं। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग सम्मानजनक वेतन, सेवा सुरक्षा और भविष्य को सुरक्षित करने की है।

पंचायत सहायकों का कहना है कि ग्राम पंचायतों में कार्य करने के लिए प्रदेश के गांवों के शिक्षित युवाओं का चयन किया गया था। चयन प्रक्रिया में अपनी ग्राम पंचायत में बेहतर शैक्षिक योग्यता और मेरिट रखने वाले युवाओं को अवसर मिला। उम्मीद थी कि इस नियुक्ति के जरिए ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षित युवाओं को रोजगार के साथ-साथ सम्मानजनक भविष्य मिलेगा, लेकिन करीब पांच वर्षों से लगातार कार्य करने के बावजूद उन्हें महज 6,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है।

जिम्मेदारियां बढ़ती गईं, मानदेय वहीं का वहीं

पंचायत सहायकों का कहना है कि पिछले पांच वर्षों में ग्राम पंचायतों में डिजिटल और ऑनलाइन कामकाज का दायरा लगातार बढ़ा है। ग्रामीणों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी देने से लेकर ऑनलाइन आवेदन, डाटा एंट्री, पंचायत संबंधी अभिलेखों और अन्य विभागीय कार्यों में पंचायत सहायकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।

आंदोलनकारियों का कहना है कि उनसे उनकी क्षमता और योग्यता के अनुरूप लगातार काम लिया जा रहा है, लेकिन उनके पारिश्रमिक में उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं की गई। मौजूदा महंगाई में 6 हजार रुपये मासिक मानदेय में परिवार का खर्च चलाना बेहद कठिन है। यही वजह है कि प्रदेशभर के पंचायत सहायकों में सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।

‘शिक्षित युवाओं को मिला रोजगार, लेकिन भविष्य अभी भी असुरक्षित’

पंचायत सहायकों का कहना है कि गांव के प्रतिभाशाली और शिक्षित युवाओं को पंचायतों में जिम्मेदारी देकर सरकार ने ग्रामीण स्तर पर डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने का काम किया, लेकिन इन युवाओं को ही आर्थिक रूप से मजबूत नहीं किया गया।

पंचायत सहायकों के मुताबिक, पांच साल का अनुभव हासिल करने के बाद भी उनके सामने रोजगार की स्थिरता और भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। उनका कहना है कि सरकार को उनके अनुभव और कार्य की प्रकृति को देखते हुए ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए, जिससे वर्षों से पंचायतों में काम कर रहे कर्मचारियों को आगे बढ़ने का अवसर मिल सके।

चार सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन

आंदोलनकारियों की ओर से जारी अपील में पंचायत सहायकों के सम्मान, अधिकार, मानदेय वृद्धि, सेवा सुरक्षा और उज्ज्वल भविष्य से जुड़ी चार प्रमुख मांगें रखी गई हैं।

  1. मानदेय में बड़ी बढ़ोतरी — पंचायत सहायकों का मानदेय बढ़ाकर ग्राम पंचायत सचिव के समकक्ष 30 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाए अथवा कम से कम प्रदेश में निर्धारित न्यूनतम कुशल मजदूरी दर के बराबर मानदेय दिया जाए।
  2. सेवा सुरक्षा और कर्मचारी का दर्जा — पंचायत सहायकों की अनुबंध/संविदा प्रक्रिया समाप्त कर स्थायी सेवा नियमावली बनाई जाए तथा उन्हें राज्य कर्मचारी का दर्जा प्रदान किया जाए।
  3. महिला पंचायत सहायकों को सुविधा — महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश की सुविधा देने के साथ उनकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए स्थानांतरण एवं समायोजन की नीति लागू की जाए।
  4. भविष्य की भर्ती में आरक्षण — पंचायत सहायकों के अनुभव एवं कार्य को देखते हुए आगामी ग्राम विकास अधिकारी/ग्राम पंचायत अधिकारी की भर्ती में 50 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण प्रदान किया जाए।

सम्मानजनक वेतन की मांग पर एकजुट पंचायत सहायक

धरने में शामिल पंचायत सहायकों का कहना है कि वे सरकार से किसी विशेष कृपा की मांग नहीं कर रहे हैं। उनकी मांग है कि जिस जिम्मेदारी के साथ वे ग्राम पंचायतों में काम कर रहे हैं, उसके अनुरूप उन्हें सम्मानजनक वेतन दिया जाए।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आज के दौर में महंगाई लगातार बढ़ रही है। ऐसे में 6,000 रुपये मासिक मानदेय पर परिवार का खर्च चलाना और भविष्य के लिए बचत करना लगभग असंभव है। पांच वर्षों तक सेवा देने के बाद भी यदि आर्थिक स्थिति में सुधार नहीं होता है तो स्वाभाविक रूप से कर्मचारियों में असंतोष पैदा होना तय है।

ईको गार्डन से सरकार को संदेश

पंचायत सहायकों ने ईको गार्डन में जुटकर सरकार से स्पष्ट शब्दों में अपनी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है। यूनियन की ओर से प्रदेश के प्रत्येक संगठन, मंडल, जनपद, ब्लॉक और ग्राम पंचायत से अधिक से अधिक संख्या में पंचायत सहायकों को लखनऊ पहुंचने का आह्वान किया गया है।

आंदोलनकारियों का कहना है कि यह धरना केवल मानदेय बढ़ाने की मांग नहीं, बल्कि प्रदेश के हजारों पंचायत सहायकों के सम्मान, रोजगार की सुरक्षा और भविष्य से जुड़ी लड़ाई है। उनका कहना है कि पांच वर्षों से सेवाएं देने वाले शिक्षित युवाओं को अब भी यदि सम्मानजनक वेतन नहीं मिलता है, तो उनकी आर्थिक परेशानियां दूर होना मुश्किल है।

पंचायत सहायकों ने सरकार से मांग की है कि उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करते हुए जल्द निर्णय लिया जाए, ताकि वर्षों से ग्राम पंचायतों में काम कर रहे इन शिक्षित युवाओं को आर्थिक राहत और भविष्य की सुरक्षा मिल सके। फिलहाल ईको गार्डन में पंचायत सहायकों का अनिश्चितकालीन धरना जारी है और आंदोलनकारियों की निगाहें अब सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।

Durgendra Samrat
Durgendra Samrathttp://www.mooknayaknews.com
Durgendra Samrat मीडिया जगत का एक विश्वसनीय और प्रतिष्ठित नाम हैं वर्तमान में वे Mooknayak News में State Sub Editor के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में तीन वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। राजनीति, चुनाव, व्यवसाय, सामाजिक मुद्दों, अपराध और जमीनी सरोकारों से जुड़े विषयों पर उनकी गहरी समझ और मजबूत पकड़ है निष्पक्ष, तथ्यपरक और जनहितकारी पत्रकारिता के लिए जाने जाते है।
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