मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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धर्म, जाति और भगवान के नाम पर होने वाले झगड़े किसी भी समाज और परिवार की उन्नति के सबसे बड़े दुश्मन हैं। जब समाज इन संकीर्ण दीवारों में बंट जाता है, तो आपसी भाईचारा और विश्वास खत्म हो जाता है।पारिवारिक स्तर पर, ऐसे विवाद अपनों के बीच नफरत की दीवार खड़ी कर देते हैं। जिस ऊर्जा और धन का उपयोग बच्चों की अच्छी शिक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर भविष्य के लिए होना चाहिए, वह आपसी मनमुटाव, मुकदमों या हिंसा में नष्ट हो जाता है। ऐसे माहौल में पलने वाले बच्चे मानसिक रूप से असुरक्षित महसूस करते हैं, जिससे उनका व्यक्तिगत विकास रुक जाता है।
सामाजिक स्तर पर, ये झगड़े देश की आर्थिक और सांस्कृतिक प्रगति को पूरी तरह ठप कर देते हैं। नफरत के कारण दंगे होते हैं, जिससे सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचता है और व्यापार ठप हो जाता है। कोई भी नया निवेशक ऐसे अशांत क्षेत्रों में पूंजी लगाने से बचता है, जिससे रोजगार के अवसर खत्म होते हैं। वास्तव में, भगवान या धर्म कभी भी आपस में लड़ना नहीं सिखाते। वे मानवता, दया और एकता का संदेश देते हैं। जब तक हम इन झूठे बंधनों से ऊपर उठकर शिक्षा, विज्ञान और विकास को प्राथमिकता नहीं देंगे, तब तक एक समृद्ध समाज की कल्पना असंभव है। प्रगति के लिए धर्म नहीं, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण जरूरी है।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

