मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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शुद्धीकरण’ और ‘पवित्रता’ के नाम पर समाज में पनपने वाली हीन भावना वास्तव में सामाजिक विभाजन और मानसिक गुलामी का सबसे बड़ा प्रमाण है। यह रूढ़िवादी सोच इंसानों के बीच दूरियां बढ़ाती है। जब तक हम इस मानसिक गुलामी से मुक्त नहीं होंगे, तब तक एक समतामूलक और सशक्त समाज का निर्माण असंभव है। वास्तविक शुद्धता विचारों की संकीर्णता को मिटाने और हर मनुष्य को समान सम्मान देने में है। शुद्धता और अशुद्धता के कृत्रिम पैमाने समाज को ‘उच्च’ और ‘निम्न’ श्रेणियों में बांटते हैं।
शुद्धीकरण की यह भावना जन्म, जाति या नस्ल के आधार पर इंसानों को एक-दूसरे से दूर करती है। जब एक वर्ग खुद को स्वतः ‘शुद्ध’ मान लेता है, तो वह दूसरे वर्ग के प्रति मानवीय संवेदना खो देता है। यह विभाजन सामाजिक एकता को नष्ट कर भाईचारे की नींव को कमजोर करता है। हीन भावना से ग्रस्त व्यक्ति या समाज कभी स्वतंत्र सोच नहीं रख सकता। लोग बिना तर्क किए दमनकारी सामाजिक नियमों और कुप्रथाओं को नियति मानकर स्वीकार कर लेते हैं। यह हीन भावना मानवीय विवेक, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आत्मसम्मान को पूरी तरह पंगु बना देती है ।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

