BTMC एक्ट 1949 निरस्त करने की मांग को लेकर 23 से 27 अगस्त तक पटना में पांच दिवसीय भूख हड़ताल
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आवास के सामने जुटेंगे देशभर के बौद्ध अनुयायी, महाबोधि महाविहार का प्रबंधन बौद्धों को सौंपने की उठेगी बुलंद आवाज
मूकनायक समाचार — सत्यशील गोंडाने
बालाघाट (मध्यप्रदेश)
बालाघाट। विश्वभर के बौद्ध अनुयायियों की आस्था और श्रद्धा के सबसे महत्वपूर्ण केंद्रों में शामिल महाबोधि महाविहार, बोधगया के प्रबंधन को बौद्ध अनुयायियों के हाथों में सौंपने की मांग एक बार फिर तेज होने जा रही है। महाबोधि महाविहार बोधगया मुक्ति आंदोलन समिति के तत्वावधान में बिहार की राजधानी पटना में 23 अगस्त से 27 अगस्त 2026 तक पांच दिवसीय भूख हड़ताल आयोजित की जाएगी। आंदोलनकारियों का प्रमुख उद्देश्य बोधगया टेम्पल मैनेजमेंट कमेटी एक्ट, 1949 (BTMC Act) को निरस्त कर महाबोधि महाविहार के प्रबंधन की जिम्मेदारी बौद्ध अनुयायियों को सौंपना है।
आंदोलन समिति के अनुसार भूख हड़ताल बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आवास के सामने आयोजित की जाएगी। इसमें देश के विभिन्न प्रांतों से बौद्ध उपासक-उपासिकाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, धम्म अनुयायियों और आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों के शामिल होने का दावा किया गया है।
1895 से चली आ रही है महाबोधि महाविहार मुक्ति की मांग
महाबोधि महाविहार के प्रबंधन को लेकर बौद्ध समाज की मांग कोई नई नहीं है। आंदोलन समिति के अनुसार इस संघर्ष का इतिहास अनागारिक धम्मपाल जी के प्रयासों तक पहुंचता है। वर्ष 1895 में अनागारिक धम्मपाल जी ने तत्कालीन कलकत्ता न्यायालय में महाबोधि महाविहार के संबंध में याचिका प्रस्तुत की थी।
उस दौर में भारत अंग्रेजी शासन के अधीन था। इसके बावजूद महाबोधि महाविहार को बौद्ध अनुयायियों के अधिकार और प्रबंधन से जोड़कर आंदोलन लगातार आगे बढ़ता रहा। आंदोलन समिति का कहना है कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में भी इस विषय को उठाया गया और यह आश्वासन दिया गया था कि भारत के स्वतंत्र होने के बाद महाबोधि महाविहार का प्रबंधन बौद्ध अनुयायियों को सौंप दिया जाएगा।
लेकिन 15 अगस्त 1947 को देश स्वतंत्र होने के बाद भी यह मांग पूरी नहीं हुई।
1949 का कानून बना आंदोलन का केंद्र
आंदोलन समिति के अनुसार स्वतंत्रता के बाद तत्कालीन बिहार सरकार द्वारा बोधगया टेम्पल मैनेजमेंट कमेटी एक्ट, 1949 बनाया गया। समिति का आरोप है कि इस व्यवस्था में महाविहार के प्रबंधन में बौद्धों को पूर्ण अधिकार नहीं मिला।
समिति के अनुसार वर्तमान संघर्ष की मूल मांग इसी कानून को समाप्त करने और महाबोधि महाविहार का प्रबंधन बौद्ध अनुयायियों को सौंपने की है।
बौद्ध समाज का तर्क है कि महाबोधि महाविहार भगवान बुद्ध के जीवन और ज्ञान प्राप्ति से जुड़ा विश्व का अत्यंत महत्वपूर्ण बौद्ध तीर्थस्थल है। इसलिए इसके धार्मिक स्वरूप, परंपरा और प्रबंधन में बौद्ध समुदाय की निर्णायक भूमिका होनी चाहिए।
कानूनी लड़ाई भी पहुंची सर्वोच्च न्यायालय तक
महाबोधि महाविहार के प्रबंधन को लेकर आंदोलन केवल धरना-प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मामला न्यायालय तक भी पहुंचा। आंदोलन समिति के अनुसार पूज्य भदंत सुरई ससाई जी ने BTMC एक्ट को निरस्त करने और महाबोधि महाविहार के प्रबंधन को बौद्ध अनुयायियों को सौंपने की मांग को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में रिट पिटीशन क्रमांक 380/2012 प्रस्तुत की।
समिति के अनुसार बाद में भदंत सुरई ससाई जी राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग, दिल्ली के सदस्य भी रहे, लेकिन महाबोधि महाविहार के प्रबंधन से जुड़ी मूल मांग का समाधान नहीं हो सका।
इसके बाद आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए पूज्य भदंत धम्म शिखर जी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, महाबोधि महाविहार बोधगया मुक्ति आंदोलन समिति द्वारा वर्ष 2018 में इंटरवेंशन पिटीशन क्रमांक 91048/2018 प्रस्तुत की गई।
समिति का कहना है कि भदंत धम्म शिखर जी द्वारा याचिका प्रस्तुत किए जाने के बाद वे सर्वोच्च न्यायालय में नियत पेशियों पर अधिकृत अधिवक्ता के साथ उपस्थित होते रहे और कानूनी स्तर पर इस मुद्दे को मजबूती से आगे बढ़ाया।
जंतर-मंतर के बाद अब पटना में बड़ा आंदोलन
महाबोधि महाविहार बोधगया मुक्ति आंदोलन समिति के राष्ट्रीय महासचिव आकाश लामा के नेतृत्व में आंदोलन को देशव्यापी स्वरूप देने का प्रयास किया जा रहा है। समिति का कहना है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में बौद्ध अनुयायियों द्वारा BTMC एक्ट के विरोध में समय-समय पर आंदोलन और प्रदर्शन किए गए हैं।
इसी क्रम में राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी आंदोलन किया गया। आंदोलनकारियों का कहना है कि लंबे समय से मांग उठाए जाने के बावजूद सरकार की ओर से अपेक्षित निर्णय नहीं लिया गया।
अब समिति ने बिहार की राजधानी पटना को आंदोलन का अगला केंद्र बनाया है। पांच दिवसीय भूख हड़ताल के माध्यम से सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति तैयार की गई है।
23 अगस्त से 27 अगस्त तक चलेगा अनशन
समिति के अनुसार 23 अगस्त 2026 से 27 अगस्त 2026 तक पांच दिनों तक भूख हड़ताल की जाएगी। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह केवल किसी एक संगठन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि महाबोधि महाविहार से जुड़े विश्वभर के बौद्ध समाज की भावनाओं और अधिकारों से जुड़ा विषय है।
आंदोलन समिति ने मध्यप्रदेश सहित देशभर के बौद्ध उपासक-उपासिकाओं से पटना पहुंचकर आंदोलन में भागीदारी करने का आह्वान किया है।
समिति का कहना है कि जब तक महाबोधि महाविहार के प्रबंधन से संबंधित बौद्ध समाज की मांग पर ठोस और निर्णायक पहल नहीं होती, तब तक इस मुद्दे को विभिन्न लोकतांत्रिक एवं कानूनी मंचों पर उठाया जाता रहेगा।
बौद्ध समाज की प्रमुख मांगें
आंदोलन के केंद्र में मुख्य रूप से महाबोधि महाविहार से संबंधित BTMC Act 1949 को निरस्त करने, महाविहार के प्रबंधन में बौद्ध अनुयायियों की निर्णायक भूमिका सुनिश्चित करने और महाबोधि महाविहार की धार्मिक एवं ऐतिहासिक परंपराओं के अनुरूप व्यवस्था स्थापित करने की मांग है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि महाबोधि महाविहार केवल बिहार या भारत की संपत्ति नहीं, बल्कि विश्व के करोड़ों बौद्ध अनुयायियों की आस्था का केंद्र है। इसलिए इसके प्रबंधन से जुड़े किसी भी निर्णय में बौद्ध समाज की भावना और धार्मिक अधिकारों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
पटना आंदोलन पर टिकी देशभर की नजरें
23 अगस्त से शुरू होने वाला पांच दिवसीय आंदोलन ऐसे समय में हो रहा है जब महाबोधि महाविहार के प्रबंधन को लेकर बौद्ध समाज में लंबे समय से असंतोष और मांग उठती रही है। आंदोलन समिति इस कार्यक्रम को निर्णायक चरण के रूप में प्रस्तुत कर रही है।
अब देखना यह होगा कि पांच दिवसीय भूख हड़ताल के बाद बिहार सरकार और केंद्र सरकार की ओर से इस मुद्दे पर क्या रुख सामने आता है। फिलहाल महाबोधि महाविहार बोधगया मुक्ति आंदोलन समिति ने देशभर के बौद्ध अनुयायियों से पटना पहुंचने और आंदोलन को मजबूत बनाने का आह्वान किया है।
आंदोलन समिति का स्पष्ट संदेश है—महाबोधि महाविहार की मुक्ति और प्रबंधन में बौद्ध समाज के अधिकार की मांग को अब देशव्यापी आवाज दी जाएगी।

