Tuesday, September 29, 2026
Homeमध्यप्रदेशभावांतर योजना बंद करो, ₹3100 में धान खरीदी करो

भावांतर योजना बंद करो, ₹3100 में धान खरीदी करो

सरकारी समितियों से पूर्व व्यवस्था बहाल करने की मांग, किसान गर्जना संगठन ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन


मूकनायक/ सत्यशील गोंडानें

बालाघाट/मध्य प्रदेश
बालाघाट। धान उत्पादक किसानों के हितों को लेकर किसान गर्जना संगठन, मध्यप्रदेश ने प्रदेश सरकार के समक्ष मोर्चा खोलते हुए भावांतर योजना को तत्काल बंद करने तथा पूर्व की भांति सरकारी समितियों के माध्यम से धान खरीदी व्यवस्था बहाल करने की मांग की है। संगठन ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन प्रस्तुत कर किसानों से ₹3100 प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी सुनिश्चित करने तथा किसानों के लिए किए गए वादों के अनुरूप “मोदी की गारंटी” लागू करने की मांग उठाई है।

संगठन का कहना है कि मध्यप्रदेश के धान उत्पादक किसान लंबे समय से अपनी उपज के उचित मूल्य, सरकारी खरीदी और लागत के अनुरूप लाभकारी दाम की मांग करते आ रहे हैं। ऐसे समय में प्रस्तावित भावांतर योजना को किसानों के हित में नहीं माना जा रहा है। संगठन के अनुसार इस व्यवस्था में किसानों को अपनी उपज का सुनिश्चित और सम्मानजनक मूल्य मिलने को लेकर आशंका बनी हुई है।

व्यापारियों के हाथों कम दाम में धान बेचने की मजबूरी का जताया अंदेशा

किसान गर्जना संगठन ने ज्ञापन में कहा कि यदि सरकारी खरीदी की मजबूत व्यवस्था नहीं रही तो किसानों को अपनी धान की उपज खुले बाजार में व्यापारियों को कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। इससे किसान को उसकी मेहनत और लागत का उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा तथा उसकी आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

संगठन ने स्पष्ट किया कि किसानों के हित में भावांतर योजना को तत्काल समाप्त करते हुए जिस प्रकार पूर्व में सरकारी समितियों के माध्यम से धान खरीदी की जाती रही है, उसी व्यवस्था को यथावत लागू किया जाना चाहिए। खरीदी प्रक्रिया पारदर्शी हो तथा किसान को अपनी उपज बेचने के लिए किसी बिचौलिए पर निर्भर न रहना पड़े।

संगठन की सात प्रमुख मांगें

किसान गर्जना संगठन ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपे ज्ञापन में प्रमुख रूप से मांग की है कि—

  1. भावांतर योजना को तत्काल बंद किया जाए।
  2. सरकारी समितियों के माध्यम से धान खरीदी की पूर्व व्यवस्था को यथावत जारी रखा जाए।
  3. किसानों से धान की खरीदी ₹3100 प्रति क्विंटल की दर से सुनिश्चित की जाए।
  4. किसानों को उनकी उपज का लाभकारी एवं सुनिश्चित मूल्य मिले तथा किसी भी किसान को औने-पौने दाम पर धान बेचने के लिए मजबूर न होना पड़े।
  5. किसानों से किए गए वादों और “मोदी की गारंटी” को लागू किया जाए, ताकि किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य एवं सम्मानजनक आय सुनिश्चित हो सके।
  6. धान खरीदी प्रक्रिया में बिचौलियों की भूमिका समाप्त कर किसानों से सीधे और पारदर्शी तरीके से सरकारी खरीदी सुनिश्चित की जाए।
  7. खरीदी केंद्रों पर किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी, अनावश्यक कटौती अथवा अतिरिक्त शुल्क का सामना न करना पड़े।

“अन्नदाता की मेहनत का सम्मान करे सरकार”

ज्ञापन में संगठन ने कहा कि किसान देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। किसान दिन-रात मेहनत कर अन्न का उत्पादन करता है। ऐसे में उसकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। किसानों को लागत और मेहनत के अनुरूप लाभकारी मूल्य नहीं मिलने की स्थिति में कृषि क्षेत्र पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है।

संगठन ने सरकार से आग्रह किया है कि किसानों की मांगों को केवल आश्वासन तक सीमित न रखते हुए धान खरीदी की ठोस और किसान हितैषी व्यवस्था लागू की जाए। संगठन के अनुसार ₹3100 प्रति क्विंटल की दर से सरकारी खरीदी किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन की चेतावनी

किसान गर्जना संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि किसानों की इन मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो संगठन प्रदेश के किसानों के साथ लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। संगठन ने कहा कि आंदोलन की स्थिति निर्मित होने पर इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने मुख्यमंत्री से धान उत्पादक किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए तत्काल निर्णय लेने की मांग की है। अब देखना होगा कि सरकार भावांतर योजना को लेकर किसानों की आपत्तियों और ₹3100 प्रति क्विंटल धान खरीदी की मांग पर क्या निर्णय लेती है।

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments