स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में सरपंच के कथित शुद्धिकरण का आरोप, जांच और कार्रवाई की मांग
मूकनायक
छत्तीसगढ़
महासमुंद/सरायपाली। ग्राम पंचायत किसड़ी में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित ध्वजारोहण कार्यक्रम के दौरान अनुसूचित जाति वर्ग से निर्वाचित सरपंच नीलमणि रात्रे के साथ कथित जातिगत भेदभाव एवं सार्वजनिक अपमान किए जाने का मामला सामने आया है। सरपंच ने इस संबंध में 18 अगस्त को थाना प्रभारी, बलौदा के समक्ष लिखित शिकायत प्रस्तुत कर घटना की निष्पक्ष जांच तथा संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत में सरपंच नीलमणि रात्रे ने आरोप लगाया है कि 15 अगस्त को ग्राम पंचायत किसड़ी में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान पूजा-अर्चना के समय ग्राम पंचायत सचिव पृथ्वीराज भोई और स्कूल व्याख्याता किशोर रथ द्वारा कथित रूप से “शुद्धिकरण” की बात की गई। इसके बाद मंत्रोच्चार करते हुए उनके ऊपर तुलसी पानी का छिड़काव किया गया। शिकायतकर्ता के अनुसार, घटना के समय पंचायत प्रतिनिधि, ग्रामीण तथा विद्यालय के शिक्षक एवं विद्यार्थी भी मौके पर मौजूद थे।
सरपंच ने अपनी शिकायत में कहा है कि उक्त घटना का वीडियो उनके पास उपलब्ध है तथा प्रत्यक्षदर्शियों की सूची भी पुलिस को दी गई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि घटना सामान्य धार्मिक अथवा पारंपरिक कार्यक्रम का हिस्सा नहीं थी, बल्कि उनकी जातिगत पहचान के कारण उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित करने के उद्देश्य से की गई कार्रवाई थी। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
शिकायत में सरपंच ने संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच, घटना के वीडियो को सुरक्षित रखकर साक्ष्य के रूप में लेने तथा मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम सहित लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की मांग भी की है।
शिकायतकर्ता ने पुलिस से यह भी आग्रह किया है कि यदि जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की गई है।
शिकायत में जिन व्यक्तियों की भूमिका की जांच की मांग की गई है, उनमें स्कूल व्याख्याता किशोर रथ, ग्राम पंचायत सचिव पृथ्वीराज भोई तथा कुछ अन्य पंचायत एवं स्थानीय स्तर के व्यक्तियों के नाम शामिल हैं।
//)कानूनी पहलू पर भी उठे सवाल///
SC/ST (Prevention of Atrocities) Act में अनुसूचित जाति/जनजाति के सदस्यों के विरुद्ध कुछ प्रकार के जानबूझकर किए गए अपमान और सामाजिक बहिष्कार जैसे कृत्यों के लिए प्रावधान हैं। अधिनियम में संबंधित अधिकारियों के लिए शिकायत/FIR दर्ज करने तथा पीड़ित या गवाहों के बयान दर्ज करने जैसे कर्तव्यों का भी उल्लेख है।
हालांकि, किसी विशेष घटना में कौन-सी धाराएं लागू होंगी और अपराध बनता है या नहीं, इसका निर्धारण उपलब्ध साक्ष्यों, घटना की परिस्थितियों, कथित कृत्य के उद्देश्य तथा जांच के निष्कर्ष के आधार पर संबंधित जांच एजेंसी और न्यायिक प्रक्रिया द्वारा किया जाना है। इसलिए शिकायत में लगाए गए आरोपों को जांच पूरी होने से पहले अंतिम रूप से सिद्ध अपराध के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
////पुलिस कार्रवाई का इंतजार////
सरपंच नीलमणि रात्रे ने पुलिस से शिकायत पर तत्काल और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है। छत्तीसगढ़ पुलिस के नागरिक सेवा पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने तथा FIR की स्थिति देखने जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।
अब पूरे मामले में पुलिस जांच और उपलब्ध वीडियो फुटेज तथा प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट होने का इंतजार है। यदि जांच में जाति के आधार पर सार्वजनिक अपमान अथवा कानून के तहत कोई अन्य अपराध प्रथम दृष्टया सामने आता है, तो संबंधित प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकता है।


