मूकनायक/ दुर्गेन्द्र सम्राट उत्तर प्रदेश उप संपादक बस्ती/ उत्तर प्रदेश
बस्ती। अमरौली-शुमाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल तस्वीर एक बार फिर सामने आई है बुधवार सुबह 11:39 बजे तक डॉक्टर की कुर्सी खाली पड़ी मिली और सामने स्थित डॉक्टर का एक कक्ष बंद था अस्पताल में कोई डॉक्टर मरीजों को देखने के लिए मौजूद नहीं था जबकि इलाज की आस में मरीजों की लंबी कतार लगी हुई थी।
अस्पताल पहुंचे मरीज डॉक्टर के आने का घंटों इंतजार करते रहे मौके पर मौजूद मरीजों ने बताया कि डॉक्टरों के समय पर अस्पताल में उपलब्ध नहीं रहने की शिकायत नई नहीं है उनके अनुसार कई दिनों से ऐसी स्थिति बनी हुई है जिसके चलते इलाज के लिए दूर-दराज से आने वाले मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि कुछ दिन पहले रात के समय डॉक्टर के अस्पताल में मौजूद नहीं रहने पर लोगों ने अस्पताल परिसर में हंगामा किया था इसके बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ सवाल उठ रहा है कि बार-बार शिकायत और विरोध के बाद भी मरीजों को समय पर डॉक्टर क्यों नहीं मिल पा रहे हैं?
वहां पर ईलाज के लिए मौजूद अजय वर्मा, सनी देवल और विनय ने बताया कि सीएचसी की अव्यवस्था और डॉक्टरों की कथित लापरवाही को लेकर पहले भी कई बार समाचार प्रकाशित हो चुके हैं मामले की शिकायत मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) से भी की गई थी लेकिन उनके मुताबिक अब तक कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई।
मामले को लेकर पत्रकारों ने बस्ती के सीएमओ डॉ. राजीव निगम से बात की सीएमओ ने तत्काल मामले की जानकारी लेने और संबंधित इंचार्ज से बात करने का आश्वासन दिया।
शिकायत के करीब 20 मिनट बाद सीएचसी अधीक्षक डॉ. अमित कुमार कन्नौजिया अस्पताल पहुंचे और मरीजों को देखना शुरू किया इसके बाद मरीजों को चिकित्सकीय सुविधा मिलनी शुरू हुई।
सरकारी अस्पताल में मरीजों की लगी कतार और डॉक्टर की खाली कुर्सी स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है आखिर जब अस्पताल में मरीज इलाज के लिए पहुंच चुके थे तो निर्धारित समय पर डॉक्टर कहां थे? यदि डॉक्टरों की गैर मौजूदगी की शिकायतें पहले भी की जा चुकी हैं तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध कराना स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी है ऐसे में अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग की अगली कार्रवाई पर हैं क्या इस बार जांच होगी, जिम्मेदारी तय होगी और लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई होगी या फिर मरीजों को इसी तरह डॉक्टर की खाली कुर्सी निहारते हुए इंतजार करना पड़ेगा?

