
बिलासपुर/बिल्हा। विकास के दावों के बीच बिल्हा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत कोरमी के दैहान मोहल्ले की तस्वीर जिम्मेदारों के लिए आईना दिखाने वाली है। बारिश शुरू होते ही मुख्य सड़क से दैहान मोहल्ले तक करीब 2 किलोमीटर का मार्ग सड़क कम और कीचड़ का रास्ता अधिक नजर आने लगा है। ग्रामीणों के लिए यह रास्ता अब आवागमन का साधन नहीं, बल्कि रोजाना जोखिम उठाने की मजबूरी बन चुका है।
सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों को उठानी पड़ रही है। शिक्षा हासिल करने के लिए उन्हें प्रतिदिन इसी कीचड़ भरे रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। रास्ते में फिसलकर बच्चों के गिरने की घटनाएं सामने आ रही हैं। कपड़े कीचड़ से खराब होने के कारण उन्हें विद्यालय पहुंचने के बाद भी परेशानी उठानी पड़ती है। सवाल यह है कि जब बच्चों के भविष्य की बात होती है तो क्या उनके स्कूल तक पहुंचने का रास्ता सुरक्षित होना भी विकास की प्राथमिकता में शामिल है?
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की बदहाली कोई नई समस्या नहीं है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों को कई बार इसकी जानकारी देकर पक्की सड़क निर्माण की मांग की जा चुकी है, लेकिन आश्वासनों के अलावा धरातल पर अब तक कुछ दिखाई नहीं दिया। बारिश ने जरूर अपना काम कर दिया, लेकिन जिम्मेदारों की कथित उदासीनता ने समस्या को और गंभीर बना दिया है।
स्थिति इतनी खराब है कि शासकीय चावल लेकर पहुंचने वाले वाहन को भी इस मार्ग से गुजरने में भारी दिक्कत होती है। इसका सीधा असर राशन वितरण पर पड़ रहा है और जरूरतमंद हितग्राहियों को समय पर खाद्यान्न नहीं मिल पाता। यानी सड़क की बदहाली केवल आवागमन की समस्या नहीं, बल्कि ग्रामीणों की रोजमर्रा की मूलभूत जरूरतों पर भी असर डाल रही है।
विडंबना यह है कि जनप्रतिनिधियों से ग्रामीण विकास की उम्मीद करते हैं, जबकि यहां ग्रामीणों को विकास के बजाय कीचड़ से होकर गुजरना पड़ रहा है। चुनाव के समय जिन रास्तों पर पहुंचकर जनप्रतिनिधि जनता से विकास के वादे करते हैं, उन्हीं रास्तों की बदहाली बारिश आते ही उन वादों की पोल खोल देती है।
ग्रामीणों का दर्द अब यह सवाल पूछ रहा है कि आखिर जिम्मेदारों की नजर इस सड़क पर कब पड़ेगी? क्या किसी बच्चे के गंभीर रूप से घायल होने या किसी ग्रामीण के साथ बड़ी दुर्घटना होने के बाद ही जिम्मेदार तंत्र की नींद खुलेगी? या फिर उससे पहले ही इस समस्या का स्थायी समाधान किया जाएगा?
मूलभूत सुविधाओं से जुड़े इस गंभीर मामले में अब ग्रामीण केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहते हैं। जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को चाहिए कि मौके का निरीक्षण कर तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था और स्थायी पक्की सड़क निर्माण की दिशा में आवश्यक कदम उठाएं। क्योंकि लोकतंत्र में जनता को केवल वोट देने के समय याद करना पर्याप्त नहीं—उसके सुख-दुख और मूलभूत सुविधाओं की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

