कार्यक्रम में आदिवासी समाज की गौरवशाली परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक योगदान को सम्मान के साथ याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज केवल देश की प्राचीन संस्कृति का संरक्षक ही नहीं, बल्कि जल-जंगल-जमीन और पर्यावरण संरक्षण की परंपरा का भी महत्वपूर्ण वाहक रहा है।
शिक्षा बनेगी बदलाव की ताकत
मुख्य अतिथि भगतसिंह नेताम ने समाज को संबोधित करते हुए कहा कि आदिवासी समाज की सबसे बड़ी ताकत उसकी संस्कृति, एकजुटता और संघर्षशीलता है। उन्होंने शिक्षा को सामाजिक बदलाव का सबसे प्रभावी माध्यम बताते हुए युवाओं से आगे बढ़कर अवसरों का लाभ लेने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के लोग शासन की योजनाओं की जानकारी प्राप्त करें और उनका लाभ उठाकर शिक्षा, रोजगार तथा स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ें। अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना और समाज के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाना समय की आवश्यकता है।
नेताम ने जनजातीय समुदाय के अधिकारों के संरक्षण एवं उनके उत्थान के प्रति मध्यप्रदेश अनुसूचित जनजाति आयोग की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।
प्रशासनिक अधिकारियों की रही मौजूदगी
कार्यक्रम में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक सराफ, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व गोपाल सोनी तथा जनजातीय कार्य विभाग की सहायक आयुक्त मान. शकुंतला डामोर सहित जिला प्रशासन के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं जनजातीय समाज के प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।
अतिथियों ने जनजातीय समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नमन करते हुए सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास के लिए सामूहिक प्रयास करने का संकल्प लिया।
अस्मिता से अधिकार तक—एकजुटता का संदेश
विश्व आदिवासी दिवस का यह आयोजन महज एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आदिवासी अस्मिता, सम्मान, अधिकार और सामाजिक भागीदारी को मजबूत करने का संदेश देता नजर आया। बड़ी संख्या में नागरिकों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष बना दिया।

