Tuesday, September 29, 2026
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विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव के लिए पोषण एवं बाल कल्याण पर राज्य नीति आयोग–यूनिसेफ का मंथन

बस्तर और सरगुजा में पोषण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य एवं साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण पर रहेगा विशेष फोकस, नवाचारों और अंतर-विभागीय समन्वय को मिलेगा बढ़ावा

रायपुर, 06 अगस्त। विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में पोषण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और बाल कल्याण को मजबूत आधार बनाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग और यूनिसेफ के बीच उच्च स्तरीय मंथन हुआ। राज्य नीति आयोग में आयोजित बैठक की अध्यक्षता आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा ने की। बैठक में पोषण एवं बाल कल्याण से जुड़े कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने, साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण, नवाचारों को बढ़ावा देने तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विस्तृत चर्चा की गई।

पोषण और बाल कल्याण को बताया विकसित समाज की आधारशिला

बैठक को संबोधित करते हुए राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा ने कहा कि पोषण और बाल कल्याण किसी भी विकसित और सशक्त समाज की आधारशिला हैं। उन्होंने विशेष रूप से बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों में पोषण संबंधी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए व्यावहारिक, प्रभावी और नवाचारी समाधान विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने यूनिसेफ के विशेषज्ञों से आग्रह किया कि ऐसी कार्ययोजना तैयार की जाए, जिसका लाभ प्रत्येक बच्चे, गर्भवती महिला और परिवार तक प्रभावी ढंग से पहुंच सके।

मातृ-शिशु स्वास्थ्य में नवाचारों पर हुई चर्चा

बैठक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में हो रहे नवाचारों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को पहले जहां पांच इंजेक्शन (खुराक) लेने पड़ते थे, वहीं अब एक ही इंजेक्शन से समतुल्य लाभ उपलब्ध कराया जा सकता है। इसे माताओं के लिए अधिक सुविधाजनक और मातृ-शिशु स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण नवाचार बताया गया।

एनीमिया और कुपोषण के प्रभावी समाधान पर दिया गया जोर

बैठक में बच्चों एवं महिलाओं में एनीमिया (रक्ताल्पता) और कुपोषण की समस्या के समाधान के लिए प्रभावी रणनीति तैयार करने पर भी विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा तथा अन्य संबंधित विभागों के समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।

साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और प्रभावी मॉनिटरिंग पर रहेगा फोकस

बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि राज्य नीति आयोग नीति-परामर्श, प्रभावी मॉनिटरिंग और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आयोग, यूनिसेफ के सहयोग से बस्तर सहित पूरे राज्य में पोषण एवं बाल कल्याण कार्यक्रमों के लिए साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण, अंतर-विभागीय समन्वय और निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत करेगा।

यूनिसेफ ने दोहराई सहयोग की प्रतिबद्धता

यूनिसेफ की चीफ ऑफ फील्ड ऑफिस सीमा कुमार ने कहा कि छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर संभाग के बच्चों और माताओं के स्वास्थ्य एवं पोषण के क्षेत्र में राज्य सरकार के साथ मिलकर कार्य करना यूनिसेफ की प्राथमिकता है। यूनिसेफ के सामाजिक नीति विशेषज्ञ डॉ. बाल परितोष दाश ने कहा कि पोषण और बाल कल्याण के क्षेत्र में स्थायी एवं प्रभावी परिणाम तभी प्राप्त किए जा सकते हैं, जब सभी संबंधित विभाग समन्वित रूप से कार्य करें और नीतियां साक्ष्य आधारित हों।

‘हर बच्चा स्वस्थ, हर भविष्य उज्ज्वल’ के संकल्प पर बनी सहमति

बैठक में इस बात पर सहमति व्यक्त की गई कि स्वस्थ, सुरक्षित और सुपोषित बचपन ही विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत की मजबूत नींव है। बस्तर सहित पूरे राज्य में बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा और संरक्षण को सुनिश्चित कर भविष्य की पीढ़ी को सशक्त बनाया जा सकता है, जो समावेशी एवं सतत विकास का आधार बनेगा।

तैयार होगी परिणाम-आधारित रणनीति

बैठक के समापन पर पोषण, बाल कल्याण एवं सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र में ठोस, नवाचारी और परिणाम-आधारित रणनीति पत्र तैयार करने पर सहमति बनी। इस रणनीति का उद्देश्य “हर बच्चा स्वस्थ, हर भविष्य उज्ज्वल” के संकल्प को साकार करते हुए छत्तीसगढ़ को विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करना होगा। बैठक में राज्य नीति आयोग एवं यूनिसेफ के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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