Tuesday, September 29, 2026
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राष्ट्रीय अंगदान दिवस पर सेमीनार का हुआ आयोजन।अंगदान पूरी तरह सुरक्षित और कानूनी प्रक्रिया है जो गंभीर रोगियों को नया जीवन देती है

मूकनायक/नरेश कुमार जाटव कैलादेवी/ करौली/राजस्थान

करौली। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं जिला एवं सेशन न्यायाधीश करौली अरूण कुमार बेरीवाल की अध्यक्षता में आज दिनांक 03 अगस्त 2026 को ‘‘राष्ट्रीय अंगदान दिवस‘‘ के उपलक्ष्य में एडीआर सेन्टर करौली के सभागार कक्ष में एक सेमीनार का आयोजन किया गया।
आयोजित सेमीनार में करौली जिले के समस्त न्यायिक अधिकारीगण, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी करौली, अतिरिक्त जिला कलेक्टर करौली, अधिवक्तागण, न्यायिक कर्मचारीगण एवं अधिकार मित्रगण द्वारा भाग लिया गया।
आयोजित सेमीनार में अरूण कुमार बेरीवाल अध्यक्ष एवं जिला एवं सेशन न्यायाधीश करौली द्वारा अपने उद्बोधन में बताया गया कि अंगदान किसी जीवित या मृत व्यक्ति के स्वस्थ अंगों को निकालकर किसी जरूरतमंद व्यक्ति के शरीर में प्रत्यारोपित करने की एक चिकित्सीय प्रक्रिया है।
जिससे कई मूल्यवान जानें बचाई जा सकती है। एक अकेला दाता (डोनर) कम से कम 8 से अधिक लोगों की जान बचा सकता है। भारत में अंगदान के लिए जीवनकाल में ही प्रतिज्ञा करके पंजीकरण किया जा सकता है।
जिसके बाद डोनर कार्ड मिलता है। अंगदान पूरी तरह सुरक्षित और कानूनी प्रक्रिया है जो गंभीर रोगियों को नया जीवन देती है। अंगदान दो प्रकार का होता है एक जीवित अंगदान एवं दूसरा मृत्यु के बाद अंगदान।
जीवित अंगदान में कोई जीवित व्यक्ति अपनी एक किडनी, लिवर का एक हिस्सा या अन्य ऊतक दान कर सकता है तथा मृत्यु के बाद अंगदान में ब्रेन-डेड या मृत व्यक्ति के स्वस्थ अंगों जैसे दिल, फेफडे, लिवर, किडनी, ऑखों को परिवार की सहमति से दान किया जाता है।
उन्होंनें बताया कि शरीर का कौन सा अंग कब तक ट्रांसप्लांट किया जा सकता है। उनके द्वारा अंगदान के महत्व, कानूनी प्रावधानों और समाज में इसके प्रति फैली भ्रातियों को दूर करने के संबंध में विस्तार पूर्वक जानकारी दी गयी एवं लोगों को अंगदान करने हेतु प्रेरित किया गया।
प्रताप सिंह मीना सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण करौली ने अपने उद्बोधन में बताया गया कि अंगदान एक जीवनरक्षक कार्य है जो गम्भीर रूप से बीमार लोगों को नया जीवन देता है, एक ही व्यक्ति कई जिंदगियों को बचा सकता है और यह समाज में मानवता की मिसाल है।
जिन लोगों के मुख्य अंग पूरी तरह खराब हो चुके होते है, उनके लिए अंग प्रत्यारोपण ही जीने का एकमात्र और अंतिम रास्ता होता है। अंगदान को सबसे बडा दान (महादान) माना गया है क्योंकि यह किसी मृत व्यक्ति के शरीर के हिस्सों से दूसरों को जीवन का उपहार देता है।
किसी भी संगठन को दान किए गए शवों का उपयोग वैज्ञानिक अनुसंधान और चिकित्सा प्रशिक्षण के लिए किया जाता है। शवों का उपयोग चिकित्सा छात्रों को शरीर रचना विज्ञान सिखाने के लिए किया जाता है।
इनका उपयोग नई चिकित्सा तकनीकों को बेहतर बनाने और विकसित करने के लिए भी किया जाता है।

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