मूकनायक/राजेश कुमार/जिला ब्यूरो चीफ/बस्ती/उत्तर प्रदेश
बस्ती। कलवारी थाना क्षेत्र के ग्राम सेमरा पुरषोत्तमपुर में मनरेगा कार्य के दौरान महिला श्रमिकों का कथित रूप से बिना अनुमति वीडियो बनाए जाने को लेकर विवाद का मामला सामने आया है। विरोध करने पर महिलाओं ने गाली-गलौज, जातिसूचक टिप्पणी, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, 2 अगस्त 2026 को गांव में मनरेगा के तहत तालाब की सफाई का कार्य चल रहा था। इसी दौरान एक व्यक्ति कथित रूप से कार्य कर रही महिला श्रमिकों का वीडियो बनाने लगा। महिलाओं का कहना है कि वे श्रम कार्य के दौरान काम की प्रकृति के कारण साड़ी व कपड़ों को समायोजित कर कार्य करती हैं। ऐसे में उनकी जानकारी और सहमति के बिना वीडियो बनाना उनकी निजता और गरिमा का उल्लंघन है।
महिला श्रमिकों का आरोप है कि जब उन्होंने इसका विरोध किया तो संबंधित व्यक्ति ने उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया, जातिसूचक शब्द कहे, मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित व्यक्ति मनरेगा के सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न करता है तथा मजदूरी का भुगतान रुकवाने की धमकी भी देता है।
पीड़ित पक्ष के अनुसार, घटना की सूचना डायल-112 पुलिस को दी गई थी, लेकिन पुलिस के मौके पर पहुंचने से पहले आरोपी वहां से चले गए।
महिलाओं ने पुलिस अधीक्षक बस्ती को दिए शिकायती पत्र में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं में मुकदमा दर्ज कर निष्पक्ष जांच एवं कठोर कार्रवाई की मांग की है।
शिकायतकर्ता पक्ष का यह भी दावा है कि पुलिस अधीक्षक के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान विपक्षी पक्ष भी मौजूद था। महिलाओं के अनुसार, पुलिस अधीक्षक ने संबंधित व्यक्ति से महिला श्रमिकों का वीडियो बनाने के अधिकार के संबंध में सवाल किया तथा भविष्य में इस प्रकार की घटना दोहराए जाने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी।
महिला श्रमिकों ने प्रशासन से मनरेगा कार्यस्थलों पर महिला श्रमिकों की सुरक्षा, सम्मान और निजता सुनिश्चित करने तथा सरकारी कार्य में बाधा डालने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
नोट: यह समाचार शिकायतकर्ता पक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। मामले में दूसरे पक्ष का विस्तृत पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। पुलिस जांच, उपलब्ध साक्ष्यों तथा दोनों पक्षों के बयान के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

