
पारंपरिक स्वास्थ्य परंपरा के संरक्षण पर जोर, इस वर्ष 660 वैद्यों का होगा प्रमाणन
छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड (वन विभाग) द्वारा महासमुंद वनमंडल के सहयोग से पहली बार जिला स्तरीय वैद्य सम्मेलन का आयोजन वन विद्यालय, महासमुंद में किया गया। सम्मेलन का उद्देश्य पारंपरिक स्वास्थ्य परंपरा का संरक्षण, वैद्यों को शासन की योजनाओं से जोड़ना तथा औषधीय पौधों के संरक्षण को बढ़ावा देना रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ वृक्षारोपण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम ने लाल चंदन, उपाध्यक्ष अंजय शुक्ला ने लक्ष्मी तरु तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी जे.ए.सी.एस. राव ने रीठा का पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम ने कहा कि राज्य के सभी 33 जिलों में जिला स्तरीय वैद्य सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 में क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया के माध्यम से प्रदेश के 660 पारंपरिक वैद्यों का प्रमाणन कराने का लक्ष्य रखा गया है। प्रत्येक जिले से लगभग 20 वैद्यों का चयन कर उन्हें प्रमाणित किया जाएगा।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी जे.ए.सी.एस. राव ने बताया कि बोर्ड द्वारा औषधीय पौधों की खेती, विनाश-विहीन विदोहन तकनीक का प्रशिक्षण, हीलर हर्बल गार्डन, विद्यालयों में हर्बल गार्डन की स्थापना तथा समूहों को निःशुल्क पल्वराइजर मशीन उपलब्ध कराने जैसी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं से पारंपरिक वैद्यों को तकनीकी और आर्थिक सहयोग मिल रहा है।
सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों से आए वैद्यों ने जड़ी-बूटियों से उपचार संबंधी अपने अनुभव साझा किए तथा औषधीय पौधों के संरक्षण और उपलब्धता से जुड़े सुझाव भी दिए। इस पर वन विभाग के अधिकारियों ने नियमानुसार आवश्यक सहयोग का आश्वासन दिया।

कार्यक्रम के अंत में सम्मेलन में शामिल वैद्यों और वन प्रबंधन समिति के सदस्यों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर वन विभाग के अधिकारी, पारंपरिक वैद्य तथा वन प्रबंधन समितियों के बड़ी संख्या में सदस्य उपस्थित रहे।

