Thursday, July 16, 2026
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कल्पना मानव मन की वह दिव्य और सचेतन रचनात्मक शक्ति है जो बना देती है दृश्य को अदृश्य और अदृश्य को दृश्य

मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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​कल्पना मानव मन की वह दिव्य, असीम और सचेतन रचनात्मक शक्ति है, जो भौतिकता के बंधनों को तोड़कर अस्तित्व में नए आयाम जोड़ती है। यह केवल जागती आँखों से देखा गया सपना नहीं है, बल्कि एक ऐसा सूक्ष्म औजार है, ‘जो नहीं है’ उसे देखने और ‘जो है’ उसे बदलने की सामर्थ्य रखता है अर्थात् यह दृश्य को अदृश्य और अदृश्य को दृश्य बना देती है। ​संसार में आज हम जो कुछ भी मानव-निर्मित देखते हैं—चाहे वह आसमान छूती इमारतें हों, अंतरिक्ष में तैरते उपग्रह हों या दिल को छू लेने वाली कविताएँ और पेंटिंग्स हों, वे सब कभी किसी के मस्तिष्क में केवल एक ‘अदृश्य विचार’ थे। राइट बंधुओं की कल्पना ने हवाई जहाज को जन्म दिया। उन्होंने हवा में उड़ने के ‘अदृश्य’ विचार को एक ‘दृश्य’ हकीकत में बदल दिया।
​इसके साथ ही, कल्पना में वह सामर्थ्य भी है जो वर्तमान के कठोर ‘दृश्य’ यथार्थ को गायब कर सकती है। जब एक ध्यानमग्न योगी या कोई तल्लीन कलाकार अपने काम में डूबता है, तो उसके आस-पास का कोलाहल, दुख और भौतिक संसार (दृश्य) पूरी तरह ओझल (अदृश्य) हो जाता है। ​यह शक्ति मनुष्य को कठिन परिस्थितियों से मानसिक मुक्ति दिलाने और आत्मिक शांति प्राप्त करने में मदद करती है।​कल्पना मनुष्य को प्रकृति द्वारा दिया गया वह अनुपम वरदान है, जो उसे केवल एक जीव ना बनाकर एक ‘सृजक’ (Creator) बनाता है। यदि हमारे पास कल्पना की यह दिव्य शक्ति ना होती, तो मानव सभ्यता आज भी पाषाण युग में थमी होती। यह मन का वह कैनवास है जहाँ अदृश्य सपने, दृश्य हकीकत बनने का रास्ता तलाशते हैं।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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