Thursday, July 16, 2026
Homeराजस्थानजंतर-मंतर पर टूटती सांसें और सो रही सत्ता: सोनम वांगचुक के अनशन...

जंतर-मंतर पर टूटती सांसें और सो रही सत्ता: सोनम वांगचुक के अनशन पर चुप्पी क्यों ??

मूकनायक/ दिलीप कुमार,उप-संपादक राजस्थान।

देश के जवानों के लिए शून्य डिग्री तापमान में सोलर टेंट बनाने वाले, लद्दाख की बर्फ को पिघलने से बचाने के लिए दिन-रात एक करने वाले मशहूर वैज्ञानिक और शिक्षाविद सोनम वांगचुक दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनके अनशन को दो हफ़्तों से अधिक का समय हो चुका है, उनका वजन भी 8 किलो से ज्यादा घट गया है और ब्लड प्रेशर लगातार गिर रहा है। लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस गिरते स्वास्थ्य के बीच भी न तो सरकार की नींद टूट रही है और न ही उस युवा वर्ग का जमीर जाग रहा है, जिसके भविष्य के लिए यह बुजुर्ग आंदोलन कर रहा है।सोनम वांगचुक इस बार केवल लद्दाख को ‘छठी अनुसूची’ दिलाने के लिए नहीं, बल्कि भारत देश के करोड़ों छात्रों और युवाओं के हक के लिए अनशन पर हैं। वे विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे नीट,एसएससी आदि में हुई कथित धांधली और पेपर लीक के खिलाफ, देश की शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के छात्रों के साथ भूख हड़ताल पर हैं। वह व्यक्ति जो अपने अविष्कारों से देश का नाम रोशन करता रहा, आज उसे हमारे बच्चों के भविष्य को बचाने के लिए भूखा प्यासा बैठना पड़ रहा है।जिस लद्दाख ने कारगिल की बर्फ में दुश्मन की गोलियां अपने सीने पर झेलीं, आज उसी मिट्टी का लाल अपने देश की राजधानी में लोकतंत्र की भीख मांग रहा है। यह सिर्फ सोनम वांगचुक का अनशन नहीं है, यह करोड़ो देशवासियों के जमीर का पोस्टमार्टम है। जब एक पद्मश्री वैज्ञानिक को विज्ञान के लिए नहीं, अपने बच्चों के भविष्य के लिए भूखे मरना पड़े, तो समझ लीजिए कि सत्ता कितनी बेरहम और व्यवस्था कितनी सड़ चुकी है। सोनम वांगचुक का अनशन सिर्फ एक व्यक्ति की भूख नहीं है, यह पूरे सिस्टम के लिए आईना है। यह उस व्यवस्था पर सवाल है जहां मेहनत करने वाले छात्र ठगे जाते हैं, जहां पेपर लीक माफिया फलते-फूलते हैं और जहां जिम्मेदारी तय करने की बजाय चुप्पी साध ली जाती है। जिस देश में वैज्ञानिकों को प्रयोगशाला में होना चाहिए, उन्हें अगर अनशन मंडप में बैठना पड़ रहा है तो यह हमारे लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ी चेतावनी है। जिस देश का युवा सोशल मीडिया पर रील्स, मीम्स और ट्रेंड्स के लिए अपनी रातों की नींद खराब कर देता है, वही युवा अपने भविष्य की लड़ाई लड़ रहे एक सच्चे ‘हीरो’ की अनदेखी कर रहा है। यह उदासीनता आत्मघाती और देश के लिए खतरा है। जब पेपर लीक होते हैं, तो मेहनत करने वाले युवाओं का सपना टूटता है। वांगचुक उसी टूटते सपने को जोड़ने के लिए अनशन पर हैं। यदि आज का युवा अपनी इस लड़ाई के लिए भी घरों से बाहर नहीं निकल सकता, सोशल मीडिया पर आवाज नहीं उठा सकता, तो यह मान लेना चाहिए कि देश के युवाओं का जमीर गहरी नींद में सो चुका है।सोनम वांगचुक कोई राजनीतिक नेता नहीं हैं, वे एक राष्ट्रभक्त और देश के सम्मानित नागरिक हैं। इसके बावजूद सरकार की ओर से बातचीत की कोई गंभीर पहल न होना लोकतंत्र की सेहत के लिए चिंताजनक है। उससे भी ज्यादा शर्मनाक भूमिका मुख्यधारा के मीडिया की है, जिसके पास फालतू की बहसों के लिए घंटों का समय है, लेकिन जंतर-मंतर पर देश के भविष्य के लिए भूखे बैठे एक देशभक्त की गिरती सेहत को दिखाने और सुनने के लिए कुछ मिनट भी नहीं हैं।अनशन के 15 वें दिन अपनी बिगड़ती तबीयत के बीच सोनम वांगचुक ने देशवासियों और युवाओं से एक बेहद मार्मिक अपील की है। उन्होंने कहा कि, “मुझे कोई आधुनिक गांधी या हीरो मत समझो। दूसरों में हीरो मत ढूंढो, बल्कि अपनी जिंदगी के हीरो खुद बनो और एक नागरिक के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभाओ।” उन्होंने देशवासियों से आगामी दिनों में संसद मार्च का आह्वान भी किया है। वास्तविकता भी यही हैं कि यह समय सिर्फ तमाशबीन बने देखते रहने का नहीं है। अगर आज देशवासियों ने इस निस्वार्थ आवाज का साथ नहीं दिया, तो भविष्य में कोई भी आपके बच्चों के हक और न्याय के लिए भूखा बैठने का साहस नहीं करेगा ना सत्ता सुनेगी । देश की सरकार भी अपनी हठधर्मिता छोड़कर तुरंत बातचीत के लिए तैयार नहीं हैं। देशवासियों और युवाओ को अपनी कीबोर्ड की दुनिया से बाहर निकलकर इस आंदोलन को ताकत देनी चाहिए। जमीर को जगाइए, इससे पहले कि बहुत देर ना हो जाए।

लेखक: दिलीप कुमार, उप संपादक,राजस्थान। मो: 9982678596

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments