परिस्थितियाँ नहीं, उन्हें देखने का नजरिया इंसान की मंजिल तय करता है

एक किसान का बूढ़ा बैल अचानक एक गहरे कुएँ में गिर गया। वह घंटों तक दर्द से रंभाता रहा। किसान ने बहुत विचार किया, लेकिन अंत में उसने सोचा कि बैल बूढ़ा हो चुका है और उसे बचाने में बहुत मेहनत लगेगी। उसने निर्णय लिया कि कुएँ को मिट्टी से भरकर बैल को वहीं दफना दिया जाए।
किसान ने पड़ोसियों को बुलाया। सभी फावड़े लेकर कुएँ में मिट्टी डालने लगे। शुरुआत में बैल घबरा गया, लेकिन कुछ देर बाद उसने एक अनोखा उपाय अपनाया। उसके ऊपर जितनी मिट्टी गिरती, वह उसे अपने शरीर से झटक देता और उसी मिट्टी पर एक कदम ऊपर चढ़ जाता। यह सिलसिला चलता रहा और अंततः वही मिट्टी, जो उसे दफनाने के लिए डाली जा रही थी, उसके बाहर निकलने की सीढ़ी बन गई। कुछ ही देर में बैल कुएँ के किनारे तक पहुँच गया और छलांग लगाकर बाहर आ गया।
जीवन भी हमें बार-बार ऐसी ही परिस्थितियों से गुजारता है। आलोचनाएँ, असफलताएँ, ईर्ष्या, अपमान और कठिनाइयाँ हमारे ऊपर मिट्टी की तरह डाली जाती हैं। यदि हम उन बोझों के नीचे दब जाएँ, तो वहीं रह जाते हैं। लेकिन यदि हर कठिनाई को झाड़कर उससे सीख लें और उसे आगे बढ़ने की सीढ़ी बना लें, तो सफलता निश्चित है।
याद रखिए—
- सबसे बड़ी संपत्ति — बुद्धि
- सबसे बड़ा हथियार — धैर्य
- सबसे मजबूत सुरक्षा — विश्वास
- सबसे अच्छी दवा — हँसी
और सबसे बड़ी बात, ये सभी हमें प्रकृति ने निःशुल्क दिए हैं।
अपनी सोच सकारात्मक रखें, क्योंकि सोच बदलती है तो जीवन भी बदल जाता है।
— डॉ. उमेश कुमार दुबे

