Tuesday, September 29, 2026
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मातृ-शिशु स्वास्थ्य एवं कुपोषण नियंत्रण पर प्रशासन सख्त, संयुक्त अभियान तेज

14 जुलाई से शुरू होने वाले ‘दस्तक सह स्टॉप डायरिया अभियान’ की तैयारियों की समीक्षा, स्वास्थ्य व महिला-बाल विकास विभाग को दिए आवश्यक निर्देश

बालाघाट, 12 जुलाई। जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने तथा कुपोषण पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग एवं महिला एवं बाल विकास विभाग की संयुक्त समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और पांच वर्ष तक के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा कर आवश्यक निर्देश दिए गए।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. परेश उपलप के निर्देशन में आयोजित बैठक में गर्भवती महिलाओं के समय पर एएनसी पंजीयन, नियमित स्वास्थ्य जांच, हाई रिस्क गर्भावस्था की पहचान, संस्थागत प्रसव, जननी सुरक्षा योजना, नवजात शिशुओं की देखभाल, कुपोषित बच्चों के उपचार तथा नियमित टीकाकरण अभियान की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई।

महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा के दौरान गंभीर एवं मध्यम कुपोषित बच्चों की पहचान, उपचार, गर्भवती महिलाओं के पोषण स्तर, प्रारंभिक स्तनपान, आईवाईसीएफ गतिविधियों, मुख्यमंत्री बाल आरोग्य संवर्धन कार्यक्रम, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना तथा लाड़ली लक्ष्मी योजना की प्रगति का मूल्यांकन किया गया। अधिकारियों ने आंगनवाड़ी केंद्रों में आयरन सिरप एवं आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए।

बैठक में 14 जुलाई से 31 अगस्त 2026 तक संचालित होने वाले ‘दस्तक सह स्टॉप डायरिया अभियान’ की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। अभियान के दौरान शून्य से पांच वर्ष तक के सभी बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण, प्रत्येक परिवार को ओआरएस पैकेट एवं जिंक की गोलियां उपलब्ध कराने तथा पात्र बच्चों को विटामिन-ए सिरप देने के निर्देश दिए गए।

बैठक में जिला कार्यक्रम अधिकारी देवेन्द्र सुंद्रियाल, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पंकज महाजन सहित स्वास्थ्य एवं महिला-बाल विकास विभाग के अधिकारी, सुपरवाइजर, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, एएनएम, आंगनवाड़ी एवं आशा कार्यकर्ता उपस्थित रहे। अधिकारियों ने दोनों विभागों के समन्वित प्रयासों से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने तथा कुपोषण नियंत्रण के लिए योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया।

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