Monday, July 27, 2026
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महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन में दुर्ग की अनदेखी पर उठे सवालराष्ट्रीय ट्रस्टी एस. आर. काण्डे, प्रदेश प्रभारी भंते धम्मतप एवं प्रदेश अध्यक्ष गौरखेड़े जी से समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की मांग

महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन में दुर्ग की अनदेखी पर उठे सवाल
राष्ट्रीय ट्रस्टी एस. आर. काण्डे, प्रदेश प्रभारी भंते धम्मतप एवं प्रदेश अध्यक्ष गौरखेड़े जी से समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की मांग

मूकनायक

कमलेश लवहात्रै छत्तीसगढ़ प्रभारी

दुर्ग। महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन में लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहे दुर्ग जिले के आंदोलनकारियों ने आंदोलन के राष्ट्रीय एवं प्रदेश स्तर पर दुर्ग जिले की उपेक्षा किए जाने पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यह मुद्दा किसी व्यक्ति विशेष के सम्मान या पहचान का नहीं, बल्कि आंदोलन में सक्रिय हजारों कार्यकर्ताओं के मनोबल और समान प्रतिनिधित्व का है।
आंदोलनकारियों ने कहा कि ऑल इंडिया बुद्धिस्ट फोरम द्वारा जब-जब महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन का आह्वान किया गया, दुर्ग जिले के कार्यकर्ताओं ने पूरे समर्पण और जिम्मेदारी के साथ बड़ी संख्या में भागीदारी निभाई। दुर्ग में अनेक विशाल एवं प्रभावशाली आंदोलन आयोजित हुए, जिनकी चर्चा स्थानीय स्तर पर तो हुई, लेकिन राष्ट्रीय मंचों, प्रेस वार्ताओं तथा विभिन्न आयोजनों में प्रायः दुर्ग जिले का उल्लेख नहीं किया गया।
उन्होंने सम्मानपूर्वक ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि माननीय भंते धम्मतप जी, जो ऑल इंडिया बुद्धिस्ट फोरम छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रभारी हैं, माननीय एस. आर. काण्डे जी, जो राष्ट्रीय ट्रस्टी हैं तथा दुर्ग से ही हैं, और माननीय गौरखेड़े जी, जो भारतीय बौद्ध महासभा छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष हैं, प्रदेश के समस्त जिलों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में आंदोलनकारियों की अपेक्षा है कि भविष्य में दुर्ग सहित सभी जिलों के योगदान को समान रूप से राष्ट्रीय एवं प्रदेश स्तर पर स्थान दिया जाए।
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि उनकी कोई व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा नहीं है। वे न तो अपने नाम का प्रचार चाहते हैं और न ही मंचों पर विशेष स्थान। उनकी एकमात्र मांग है कि जहां-जहां महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन की चर्चा हो, वहां दुर्ग जिले के संघर्ष, जनसहभागिता और निरंतर सक्रियता का भी निष्पक्ष उल्लेख किया जाए, ताकि आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं का मनोबल मजबूत हो और समाज में एकता का संदेश जाए।
उन्होंने कहा कि महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन किसी एक संगठन, व्यक्ति या जिले का नहीं, बल्कि पूरे बौद्ध समाज का साझा जनआंदोलन है। इसलिए सभी जिलों के योगदान को समान सम्मान देना आंदोलन की मूल भावना के अनुरूप होगा।
आंदोलनकारियों ने संबंधित नेतृत्व से आग्रह किया कि इस विषय पर गंभीरता से विचार करते हुए भविष्य में प्रेस विज्ञप्तियों, राष्ट्रीय कार्यक्रमों और सार्वजनिक मंचों पर दुर्ग जिले के योगदान को भी उचित स्थान दिया जाए। उनका कहना है कि इससे आंदोलन और अधिक सशक्त होगा तथा समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा।
महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन के साथ-साथ आंदोलन में योगदान देने वाले प्रत्येक जिले और प्रत्येक कार्यकर्ता को समान सम्मान एवं न्याय मिलना चाहिए।

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