मूकनायक/सरिता रानी
पानीपत
हरियाणा के गाँवों में जोहड़ों के किनारे वर्षों से रह रहे गरीब परिवारों के पुनर्वास और उनके अधिकारों की सुरक्षा का मामला अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी), नई दिल्ली पहुँच गया है। गांव ददलाना निवासी सामाजिक कार्यकर्ता दीपक शर्मा ने आयोग को पत्र भेजकर राज्य के लाखों गरीब परिवारों के मानवाधिकारों की रक्षा के लिए तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है।
दीपक शर्मा ने अपने पत्र में बताया कि हरियाणा के अनेक गाँवों में मजदूर, दलित, दिव्यांग, विधवा, वरिष्ठ नागरिक तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लाखों परिवार पिछले 30 से 60 वर्षों से जोहड़ों के किनारे रह रहे हैं। इन परिवारों ने अपनी मेहनत से छोटे-छोटे मकान बनाकर जीवन बसाया है, लेकिन अब उन्हें बेदखल किए जाने की कार्रवाई या आशंका का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने माँग की है कि बिना वैकल्पिक पुनर्वास के किसी भी गरीब परिवार को बेघर न किया जाए। लंबे समय से बसे पात्र परिवारों के नियमितीकरण, पुनर्वास अथवा वैकल्पिक आवास की स्पष्ट नीति बनाई जाए, ताकि उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार मिल सके और उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन न हो।
दीपक शर्मा का कहना है कि यदि राज्य सरकार पुनर्वास की व्यवस्था किए बिना इन परिवारों को हटाती है, तो यह संविधान द्वारा प्रदत्त जीवन, आवास और मानव गरिमा के अधिकार का गंभीर उल्लंघन होगा। उन्होंने विशेष रूप से दलित, दिव्यांग, विधवा, वरिष्ठ नागरिक तथा बेसहारा परिवारों के हितों की रक्षा के लिए आयोग से तत्काल हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।
उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से हरियाणा सरकार से इस पूरे मामले में रिपोर्ट तलब करने, बेदखली की कार्रवाई पर रोक लगाने तथा गरीब परिवारों के पुनर्वास के लिए ठोस नीति बनाने के निर्देश जारी करने की माँग की है। उनका कहना है कि गरीब नागरिकों को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है और पुनर्वास के बिना उन्हें बेघर करना न्यायसंगत नहीं होगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले अनेक गरीब परिवार वर्तमान स्थिति को लेकर भय और असमंजस में हैं। ऐसे में अब प्रदेशभर के लोगों की निगाहें राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के रुख और आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

